मेगा सड़क परियोजनाओं को गति देने के लिए नया फॉर्मूला, लैंड पुलिंग मॉडल पर फिर मंथन

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: पटना, 27 अप्रैल। बिहार में बड़ी सड़क परियोजनाओं को रफ्तार देने के लिए पथ निर्माण विभाग एक बार फिर “लैंड पुलिंग” मॉडल पर काम शुरू करने की तैयारी में है। पहले भी इस दिशा में पहल हुई थी, लेकिन योजना आगे नहीं बढ़ पाई थी। अब सरकार इसे नए सिरे से लागू करने पर विचार कर रही है, खासकर प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे और नए कॉरिडोर के लिए।

इस मॉडल की खास बात यह है कि इसमें पारंपरिक तरीके से जमीन अधिग्रहण कर भारी मुआवजा देने की बजाय जमीन मालिकों को विकास के जरिए लाभ पहुंचाने की योजना है। जिस एलाइनमेंट पर सड़क बननी है, उस पूरी जमीन को विभाग द्वारा विकसित किया जाएगा, जिससे उसकी कीमत कई गुना बढ़ने की संभावना है।

योजना के तहत आवश्यक जमीन का उपयोग सड़क निर्माण में किया जाएगा, जबकि बची हुई विकसित जमीन संबंधित मालिकों को वापस कर दी जाएगी। इससे किसानों और जमीन मालिकों को सीधे मुआवजे से अधिक फायदा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें बेहतर कीमत वाली जमीन के साथ कुछ आर्थिक लाभ भी मिलेगा।

सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में राज्य में कई मेगा सड़क परियोजनाएं शुरू होने वाली हैं, जिनमें सात निश्चय-3 के तहत प्रस्तावित चार एक्सप्रेस-वे और नए सड़क कॉरिडोर शामिल हैं। इन परियोजनाओं के लिए विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर जमीन की जरूरत होगी, जिसे लैंड पुलिंग के जरिए पूरा करने की योजना है।

वहीं, सड़क निर्माण के वित्तपोषण के लिए विभाग पहले से ही हाइब्रिड एन्युटि मॉडल (HAM) पर काम कर रहा है। इस मॉडल में परियोजना की कुल लागत का 40 प्रतिशत सरकार वहन करती है, जबकि शेष 60 प्रतिशत निवेश निर्माण कंपनी करती है। बाद में कंपनी को यह राशि टोल या अन्य माध्यमों से 10 से 15 वर्षों में वापस मिलती है।

सरकार को उम्मीद है कि लैंड पुलिंग और हाइब्रिड एन्युटि मॉडल के संयोजन से सड़क परियोजनाओं में तेजी आएगी, जमीन अधिग्रहण से जुड़े विवाद कम होंगे और किसानों को भी बेहतर आर्थिक लाभ मिल सकेगा।

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