NEWS PR डेस्क: पटना, 10 मई। बिहार में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार अब पैक्सों को बहुउद्देशीय संस्थाओं के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। राज्य के 8463 पैक्सों के जरिए डेयरी और मत्स्य पालन गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है, ताकि गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकें।
सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने विभागीय अधिकारियों के साथ पहली समीक्षा बैठक में पैक्सों के लिए व्यापक एक्शन प्लान तैयार करने का निर्देश दिया। सरकार का फोकस न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान, गेहूं और अन्य फसलों की खरीद, कृषि ऋण वितरण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को बढ़ाने पर रहेगा।

सरकार की योजना पैक्सों को सिर्फ ऋण वितरण केंद्र तक सीमित नहीं रखने की है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर संस्थाओं में बदलने की है। इसके तहत स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की रणनीति पर भी काम किया जाएगा।
बताया गया कि राज्य के पैक्सों से करीब एक करोड़ 25 लाख सदस्य जुड़े हैं, जिनमें 36 लाख महिलाएं शामिल हैं। हाल के दिनों में करीब साढ़े चार लाख नए सदस्य भी जोड़े गए हैं। सरकार पैक्सों को उद्यमी मॉडल पर विकसित करना चाहती है, ताकि वे अपनी आय स्वयं अर्जित कर सकें। बैठक में यह भी तय किया गया कि एक्शन प्लान लागू करने से पहले पैक्स से जुड़े किसानों और सदस्यों से सुझाव लिए जाएंगे। वहीं अगले वर्ष तक सभी पैक्सों का कंप्यूटरीकरण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के निर्देश पर पैक्स सदस्यों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी तेज किया जाएगा। सरकार ने अगले दो वर्षों में प्रखंड स्तर तक प्रशिक्षण अभियान चलाने का लक्ष्य तय किया है। रामकृपाल यादव ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र बिहार के ग्रामीण विकास की मजबूत नींव बन सकता है। उनके अनुसार, सहकारी संस्थाएं केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांवों में सामाजिक सशक्तिकरण का भी बड़ा माध्यम हैं।
सरकार प्रत्येक पैक्स में डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों के गठन की दिशा में भी काम करेगी। इससे किसानों, महिलाओं और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा और वे आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बन सकेंगे। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सहकारी संस्थाओं के प्रदर्शन में सुधार और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत कार्ययोजना जल्द तैयार की जाए।