बिहार की खेती को जलवायु-अनुकूल बनाने की तैयारी, ICRISAT में श्री अन्न और प्राकृतिक खेती पर मंथन

Rashmi Tiwari

NEWS PR डेस्क: बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती चुनौतियों के बीच बिहार में कृषि को अधिक आधुनिक, टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल बनाने की दिशा में सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में हैदराबाद स्थित ICRISAT में आयोजित कार्यक्रम में बिहार की कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने और किसानों की आय व उत्पादन क्षमता बढ़ाने को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।

कार्यक्रम में संस्थान के महानिदेशक, वरिष्ठ वैज्ञानिकों और पदाधिकारियों के साथ बिहार की कृषि के भविष्य को लेकर विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। चर्चा का प्रमुख फोकस बदलते मौसम, अनियमित मानसून, बाढ़ और कम बारिश जैसी चुनौतियों के बीच किसानों को नई तकनीक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ना रहा।
श्री अन्न और फसल विविधीकरण पर जोर
कार्यक्रम के दौरान बिहार में श्री अन्न (Millets), फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों के साथ इस बात पर विचार किया गया कि बदलते जलवायु परिस्थितियों के बीच ऐसी फसलों और कृषि तकनीकों को कैसे बढ़ावा दिया जाए, जिससे किसानों को जोखिम कम हो और खेती अधिक टिकाऊ बने। श्री अन्न को पोषण और कृषि दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, फसल विविधीकरण के जरिए किसानों को एक ही फसल पर निर्भरता कम करने और खेती से जुड़े जोखिमों को घटाने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल तकनीक से किसानों को सशक्त बनाने की तैयारी
कार्यक्रम के दौरान ICRISAT द्वारा विकसित डिजिटल क्रॉप सिस्टम का भी अवलोकन किया गया। कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक और डेटा आधारित समाधानों के इस्तेमाल से किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद देने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। मौसम, फसल और कृषि से जुड़े डेटा का बेहतर इस्तेमाल कर किसानों तक समय पर उपयोगी जानकारी पहुंचाने और खेती को अधिक वैज्ञानिक बनाने की दिशा में डिजिटल तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
₹115.19 करोड़ की परियोजना से कृषि अनुसंधान को बढ़ावा
ICRISAT, RPCAU पूसा और BAU सबौर के सहयोग से करीब ₹115.19 करोड़ की परियोजना संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य कृषि अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक तकनीक को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में काम करना है। परियोजना के जरिए प्रयोगशालाओं और शोध संस्थानों में विकसित तकनीक एवं ज्ञान को खेतों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों को इसका सीधा लाभ मिल सके।
Lab to Land’ पर फोकस
इस पहल का मुख्य उद्देश्य ‘Lab to Land’ की अवधारणा को जमीन पर उतारना है। यानी प्रयोगशाला और शोध संस्थानों में विकसित ज्ञान, तकनीक और नवाचार का वास्तविक इस्तेमाल किसानों के खेतों में हो। इसके तहत केवल फसल उत्पादन ही नहीं, बल्कि प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और बाजार तक किसानों की पहुंच बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने और कृषि से जुड़े नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। श्री अन्न और प्राकृतिक खेती से समृद्ध किसान, स्वस्थ समाज और विकसित बिहार” के निर्माण की दिशा में हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

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