बिहटा और पूर्णिया एयरपोर्ट को लेकर जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में प्रगति, दाखिल-खारिज का कार्य तेजी से जारी

Patna Desk
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पटना के बिहटा एयरपोर्ट और पूर्णिया एयरपोर्ट से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। इन दोनों हवाई अड्डों के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के बड़े हिस्से का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। शेष भूमि का कार्य भी जल्द पूरा होने की संभावना है।

यह जानकारी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के प्रतिनिधि ने राजस्व विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान दी।यह बैठक राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई थी। बैठक में विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों द्वारा अधिग्रहित, अर्जित या हस्तांतरित जमीनों के दाखिल-खारिज और जमाबंदी सृजन पर चर्चा हुई।बैठक में भारतीय रेलवे, दूरसंचार विभाग, बियाडा, एम्स (पटना व दरभंगा), रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत दानापुर कैंट, तथा कई जिलों के भू-अर्जन पदाधिकारी शामिल हुए। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि सरकारी विभागों को भूमि दो माध्यमों से मिलती है – भू-अर्जन या भू-हस्तांतरण।

भूमि प्रबंधन को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए “गवर्नमेंट लैंड म्यूटेशन पोर्टल” नामक एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है।उन्होंने स्पष्ट किया कि दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को ऑनलाइन संपन्न करने के लिए सभी विभागों को भूमि से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज रखने होंगे। साथ ही, निर्देश दिया गया कि सभी विभाग उस भूमि की प्रविष्टि इस पोर्टल पर कराएं, जो उन्हें हस्तांतरित या अधिग्रहित की गई है।बैठक के दौरान विभिन्न विभागों ने अपनी-अपनी समस्याओं को सामने रखा, जैसे रेलवे कॉलोनी, दानापुर द्वारा उठाई गई तकनीकी अड़चनें। इस पर यह तय किया गया कि प्रत्येक विभाग को अलग-अलग तिथि निर्धारित कर बुलाया जाएगा, जहां संबंधित जानकार पदाधिकारी सभी दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहेंगे और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।इसके अलावा एम्स पटना और दरभंगा को निर्देश दिया गया कि वे अपने संबंधित जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर दाखिल-खारिज और जमाबंदी प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण करें।इस समीक्षा बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विभिन्न संस्थानों को आवंटित सरकारी भूमि की ऑनलाइन प्रविष्टि और स्वामित्व हस्तांतरण समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से हो, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की भूमि विवाद या रुकावट से बचा जा सके।

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