NEWS PR डेस्क: Bihar : बिहार में लगातार बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए राज्य सरकार अब इन मामलों की जांच व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार इंस्पेक्टर रैंक की जगह दारोगा (सब-इंस्पेक्टर) रैंक के अधिकारियों को भी साइबर अपराधों की जांच का अधिकार देने की योजना बना रही है। इसके लिए गृह विभाग ने केंद्र सरकार को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव भेजा है।
बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि वर्तमान प्रावधानों के तहत आईटी एक्ट से जुड़े मामलों की जांच केवल न्यूनतम इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी ही कर सकते हैं। राज्य में ऐसे करीब 1200 से 1300 इंस्पेक्टर उपलब्ध हैं, जबकि साइबर अपराधों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2025 में साइबर थानों में 6319 मामले दर्ज किए गए। वहीं, साइबर ठगी और इंटरनेट से जुड़े अन्य अपराधों की शिकायतें लाखों में हैं। एनसीआरपी हेल्पलाइन पर 27.96 लाख कॉल आए, जबकि ऑनलाइन शिकायतों की संख्या 1.17 लाख रही। इसके अलावा, इंटरनेट मीडिया और अन्य साइबर अपराधों से जुड़ी 15,218 शिकायतें दर्ज की गईं। इसी अवधि में 1050 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी हुई।
डीजीपी के अनुसार, साइबर अपराधों की जांच तकनीकी और अंतर-राज्यीय होने के कारण काफी समय लेने वाली होती है। कई मामलों में आरोपी दूसरे राज्यों से जुड़े होते हैं और पैसे का लेन-देन अलग-अलग स्थानों से किया जाता है। ऐसे में जांच अधिकारियों को बैंकों और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय करना पड़ता है, जिससे एक इंस्पेक्टर साल में औसतन छह से आठ मामलों की ही जांच कर पाता है।
इसी चुनौती को देखते हुए सरकार दारोगा रैंक के अधिकारियों को जांच का अधिकार देने पर विचार कर रही है। राज्य में करीब 12 से 13 हजार दारोगा रैंक के अधिकारी हैं। यदि उन्हें साइबर मामलों की जांच की अनुमति मिल जाती है, तो अनुसंधान पदाधिकारियों की संख्या करीब दस गुना बढ़ जाएगी। इससे जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी और इंस्पेक्टरों पर बढ़ता कार्यभार भी कम होगा।
इसके साथ ही राज्य सरकार साइबर थानों के मानवबल को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठा रही है। डीजीपी ने बताया कि सभी जिलों के साइबर थानों में आईटी और कंप्यूटर बैकग्राउंड वाले पुलिस अधिकारियों की तैनाती की जा चुकी है और आगे और अधिक मानवबल बढ़ाने की योजना है।
गृह विभाग का कहना है कि आईटी एक्ट में संशोधन के बाद दारोगा रैंक के अधिकारी इंस्पेक्टर रैंक के समकक्ष साइबर मामलों की जांच कर सकेंगे। इससे तकनीकी और अंतर-राज्यीय साइबर अपराधों के निपटारे में लगने वाला समय कम होगा और पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला समय की मांग है। दारोगा रैंक के अधिकारियों को जांच का अधिकार मिलने से पुलिस संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, जांच की गति बढ़ेगी और साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसना आसान होगा। राज्य सरकार की यह पहल बिहार में साइबर अपराधों पर नियंत्रण की दिशा में एक अहम और सख्त कदम मानी जा रही है।