NEWS PR डेस्क: सावन शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर आज रक्षाबंधन का पर्व भद्रा से मुक्त रहेगा। उदया तिथि में पूर्णिमा होने के कारण पूरे दिन रक्षाबंधन मनाया जाएगा और बहनें अपनी सुविधा के अनुसार दिनभर भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी। पर्व को लेकर शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर गुरुवार देर रात तक राखी और मिठाइयों की खरीदारी का सिलसिला जारी रहा।

रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट स्नेह और विश्वास का पर्व है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं भाई भी बहन की हर परिस्थिति में रक्षा करने का संकल्प लेता है। राखी का यह धागा दोनों के रिश्ते में प्रेम और अपनत्व को और मजबूत करता है।
उदया तिथि में पूरे दिन रहेगा पूर्णिमा का मान
पंचांगों के अनुसार सावन शुक्ल पूर्णिमा तिथि शुक्रवार की सुबह 9:27 बजे तक रहेगी। उदया तिथि में पूर्णिमा होने के कारण इसका मान पूरे दिन माना जाएगा। रक्षाबंधन के दिन शतभिषा नक्षत्र का संयोग भी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार भद्रा रहित समय में राखी बांधने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। पूर्णिमा को चंद्रमा की पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर सूर्य सिंह राशि, गुरु कर्क राशि और शनि मीन राशि में स्थित रहेंगे। गुरु की स्थिति को ज्ञान, संस्कार और पारिवारिक मार्गदर्शन से जोड़कर देखा जाता है।
पूजा की थाली सजाकर बांधी जाएगी राखी
रक्षाबंधन के लिए बहनें पूजा की थाली में रोली, चंदन, अक्षत, फूल, मिठाई, घी का दीपक और राखी सजाएंगी। इसके बाद भाई को तिलक लगाकर आरती की जाएगी और उसकी कलाई पर राखी बांधी जाएगी। राखी बंधवाने के बाद भाई बहन को उपहार देकर उसकी सुरक्षा और सम्मान का आजीवन संकल्प लेगा।
इष्टदेवों को भी बांधी जाएगी राखी
सावन पूर्णिमा के मौके पर सनातन धर्मावलंबी अपने आराध्य देवों को भी राखी अर्पित करेंगे। शास्त्रीय विधि से तैयार और कलात्मक राखियों को इष्टदेव एवं कुलदेवता के साथ भगवान शिव, गणेश, बजरंगबली, श्रीराम और लड्डू गोपाल को भी चंदन लगाकर मंत्रोच्चार के साथ बांधा जाएगा। इसके बाद मिष्ठान और पकवान का भोग लगाकर घी के दीपक से आरती की जाएगी।
क्या है भद्रा काल?
रक्षाबंधन पर इस बार भद्रा का साया नहीं रहने से पूरे दिन राखी बांधना शुभ माना जा रहा है। भद्रा काल को अशुभ समय माना जाता है, इसलिए इस दौरान शुभ कार्य करने से बचने की परंपरा है। मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार भद्रा काल में शुभ कार्य नहीं किए जाते और इसी कारण इस अवधि में राखी बांधने की भी मनाही मानी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा की राशि के आधार पर भद्रा के वास का निर्धारण किया जाता है।
राखी बांधने के प्रमुख शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि: सुबह 9:27 बजे तक
चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: सुबह 5:29 बजे से 10:15 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:25 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक
विशिष्ट शुभ मुहूर्त: सुबह 11:51 बजे से दोपहर 1:26 बजे तक