बिहार में राजस्व व्यवस्था ठप: अंचल कर्मियों की हड़ताल से आम जनता परेशान, पंच-सरपंच संघ ने उठाई आवाज

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 20 मार्च: बिहार में अंचल कार्यालयों में चल रही हड़ताल का असर अब व्यापक रूप से आम जनता पर दिखने लगा है। त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों और ग्राम कचहरियों के साथ-साथ आम लोग भी महीनों से राजस्व संबंधी कार्य ठप रहने के कारण भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

बिहार प्रदेश पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने प्रेस वार्ता में कहा कि अंचल कार्यालय ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ होता है, लेकिन वर्तमान में अंचल अधिकारी और राजस्व अधिकारी हड़ताल पर हैं, जिससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली बाधित हो गई है।

उन्होंने बताया कि जमाबंदी, दाखिल-खारिज, भूमि विवाद, आय-निवास-ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जैसे लगभग सभी महत्वपूर्ण कार्य अंचल कार्यालय से ही संचालित होते हैं। हड़ताल के कारण ये सभी सेवाएं प्रभावित हैं, जिससे लोगों के व्यक्तिगत और सामाजिक कार्य भी अटक गए हैं।

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शादी और जमीन खरीद-बिक्री पर असर

निराला ने कहा कि कई परिवारों के सामने गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। बेटियों की शादी या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए जमीन का क्रय-विक्रय नहीं हो पा रहा है, क्योंकि छोटे-छोटे राजस्व मामलों का निपटारा लंबित है।

RTPS सेवाएं ठप, पंचायत योजनाएं प्रभावित

RTPS के तहत मिलने वाले प्रमाण पत्र जारी नहीं हो रहे हैं। वहीं आगामी पंचायत चुनाव को देखते हुए विकास योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं, क्योंकि एनओसी नहीं मिल पा रही है।

भूमि विवाद बढ़े, ग्राम कचहरियों पर दबाव

सबसे गंभीर असर भूमि विवादों पर पड़ा है। पहले अंचल अधिकारी स्तर पर जनता दरबार में मामलों की सुनवाई होती थी, लेकिन अब सुनवाई ठप है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विवाद, मारपीट और अपराध की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है। ग्राम कचहरियों पर भी मामलों का दबाव बढ़ गया है।

आपदा प्रबंधन भी प्रभावित

अंचल अधिकारी आपदा प्रबंधन के नोडल अधिकारी होते हैं। फसल क्षति, आगजनी जैसी घटनाओं में त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई आवश्यक होती है, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह व्यवस्था भी प्रभावित हो गई है।

अनुमंडल और जिला स्तर पर भी समस्या

निराला ने कहा कि समस्या केवल अंचल स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुमंडल और जिला स्तर पर भी अपीलीय कार्यवाही प्रभावित हो रही है। उन्होंने मांग की कि इन पदों पर अनुभवी और योग्य राजस्व अधिकारियों की नियुक्ति की जाए, ताकि आम जनता को समय पर न्याय मिल सके।

उन्होंने उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि अपीलीय प्राधिकार को मजबूत करना जरूरी है, ताकि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो और लोगों का प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

निराला ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री से अपील करते हुए कहा कि अधिकारियों की जायज मांगों पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लिया जाए और जल्द से जल्द हड़ताल समाप्त कराई जाए।

उन्होंने सुझाव दिया कि राजस्व और भूमि सुधार कार्यों का स्पष्ट विभाजन कर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि इस संकट का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों पर पड़ रहा है, इसलिए सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर समाधान निकालना चाहिए।

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