NEWS PR डेस्क: पटना: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद अब और तेज हो गया है। इसी मुद्दे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी है। SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तापक्ष के नेता इन आरोपों को लेकर अपनी बात रख रहे हैं। चुनाव आयोग से जुड़े विवाद में आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों और उसके बाद सामने आए बयानों ने भी इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।
SIR को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष आमने-सामने
बिहार में SIR के मुद्दे पर कांग्रेस और आरजेडी समेत विपक्षी दल चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। 25 सितंबर को पटना में विपक्ष की ओर से प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें CEC के इस्तीफे की मांग की गई।
दूसरी ओर, NDA नेताओं ने विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया का समर्थन किया है। इस बीच NDA के कुछ नेताओं की ओर से भी आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग सामने आई है।
चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर भी उठे सवाल
SIR को लेकर विवाद उस समय और बढ़ा, जब चुनाव आयोग के भीतर इस प्रक्रिया से संबंधित कुछ आपत्तियों और पत्राचार की जानकारी सामने आई। विपक्ष ने इसे आधार बनाकर आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
आयोग की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि आंतरिक स्तर पर सुझाव और टिप्पणियां संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक दल अपने-अपने पक्ष जनता के सामने रख रहे हैं और SIR को लेकर बहस लगातार जारी है।
विपक्ष के आरोपों पर सत्तापक्ष की अलग दलील
SIR विवाद को लेकर बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। विपक्ष जहां मतदाता सूची में नामों को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं NDA नेता इन आरोपों का विरोध कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी 25 सितंबर को SIR विवाद को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा और चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी। चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा ने भी आयोग से विवाद पर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत बताई है।