शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा-अर्चना की जा रही है। बिहार के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। पटना सिटी के बड़ी पटन देवी मंदिर में मां ब्रह्मचारिणी की आरती की गई, जबकि बेगूसराय के प्रसिद्ध शक्तिपीठ जयमंगला गढ़ में भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन और पूजा के लिए पहुंच रहे हैं। भक्त माता को फूल, फल, अक्षत और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सुख-समृद्धि और मंगल की कामना कर रहे हैं।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में जुटे श्रद्धालु
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता को दूध, दूध से बनी मिठाइयां, मिश्री और पंचामृत का भोग अर्पित किया जाता है। पूजा में सफेद और सुगंधित फूल चढ़ाने की भी परंपरा है। श्रद्धालु माता से ज्ञान, संयम, सदाचार और जीवन में सफलता का आशीर्वाद मांगते हैं।
क्या है मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप का महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ‘ब्रह्म’ का अर्थ तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ आचरण करने वाली है। मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग और साधना की प्रतीक मानी जाती हैं। माता के एक हाथ में जप की माला और दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित रहता है। उनका स्वरूप भक्तों को धैर्य, अनुशासन और एकाग्रता का संदेश देता है। मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। श्रद्धालु माता की पूजा कर अपने जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता की कामना करते हैं।
इस विधि से करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के दौरान सबसे पहले माता का ध्यान कर प्रार्थना करें। इसके बाद विधि के अनुसार स्नान, फूल, अक्षत, कुमकुम और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। माता को सफेद और सुगंधित फूल चढ़ाने की परंपरा है। पूजा के दौरान दूध, पंचामृत और मिश्री का भोग लगाया जा सकता है। अंत में माता की आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करें। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मंदिरों में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। श्रद्धालु पूरे उत्साह और आस्था के साथ मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं।