NEWS PR डेस्क: पटना, 14 अप्रैल। बिहार में ग्रामीण सड़कों और पुलों के निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग ने सख्त कदम उठाया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्माण कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा।
सोमवार को विभागीय सभागार में अभियंता प्रमुख की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े सभी पदाधिकारियों को हर महीने कम से कम 20 निर्माणाधीन सड़कों या पुलों की अनिवार्य जांच करनी होगी। बैठक में प्रयोगशाला, प्रमंडल और अंचल स्तर के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
जियो-टैग रिपोर्ट से बढ़ेगी पारदर्शिता
निर्माण कार्यों की निगरानी को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए विभाग ने जियो-टैगिंग प्रणाली को अनिवार्य कर दिया है। अब अधिकारियों को कार्यस्थल की जियो-टैग तस्वीरें और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट के साथ एमआईएस पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
समयबद्ध रिपोर्टिंग के निर्देश
विभाग ने निर्देश दिया है कि रूटीन निरीक्षण की रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर अपलोड की जाए, जबकि जन शिकायतों से संबंधित जांच रिपोर्ट 15 दिनों के अंदर मुख्यालय को भेजना अनिवार्य होगा। इससे निगरानी तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
कंक्रीट गुणवत्ता की ऑन-साइट जांच
पीक्यूसी (PQC) कार्यों में कंक्रीट की मजबूती की जांच के लिए ढलाई के समय ही कार्यस्थल से नमूने लेने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को पूर्व सूचना देना आवश्यक होगा।
टिकाऊ निर्माण पर जोर
ग्रामीण कार्य विभाग का मानना है कि इन सख्त निर्देशों से राज्य में टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाली ग्रामीण सड़कों एवं पुलों का निर्माण सुनिश्चित होगा। यह कदम न केवल आधारभूत संरचना को मजबूत करेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को भी सुगम बनाएगा।