बिहार में गन्ना उत्पादन को आधुनिक बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गन्ना यंत्रीकरण को तेज करने के उद्देश्य से अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभागीय योजनाओं की प्रगति पर गहन चर्चा हुई। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित इस बैठक में गन्ना उद्योग विभाग की योजनाओं—विशेष रूप से गन्ना यंत्रीकरण योजना और कस्टम हायरिंग सेंटर (CHCs)—की प्रगति और व्यवहार्यता की समीक्षा की गई। बैठक में ईखायुक्त, संयुक्त ईखायुक्त, सहायक निदेशक ईख विकास समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और चीनी मिलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि राज्य में अब तक केवल 3 चीनी मिलों ने ही CHCs स्थापित किए हैं, जबकि अन्य मिलों में इस दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है। इसके अलावा कृषि विभाग और जीविका द्वारा स्थापित CHCs में गन्ना फसल से जुड़े विशेष कृषि यंत्रों की कमी भी चिन्हित की गई। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अपर मुख्य सचिव ने सभी संबंधित अधिकारियों और चीनी मिलों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में गन्ना से संबंधित कृषि यंत्रों की जरूरत का आकलन कर 2 दिनों के भीतर रिपोर्ट गन्ना आयुक्त को सौंपें।
क्या होगा फायदा:
साथ ही, इन जानकारियों के आधार पर जल्द ही एक समेकित रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह समीक्षा राज्य सरकार की व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत बंद चीनी मिलों का पुनरुद्धार,25 नई चीनी मिलों की स्थापना,गन्ना क्षेत्र का विस्तार जैसे बड़े लक्ष्य शामिल हैं। गन्ना उद्योग विभाग का मानना है कि इन प्रयासों से गन्ना उत्पादन में वृद्धि होगी। खेती की लागत घटेगी। किसानों की आय में इजाफा होगा।
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