बिहार कांग्रेस में विधायक दल के नेता पर सस्पेंस, फैसले में देरी से बढ़ी सियासी हलचल

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपने विधायक दल का नेता तय क्यों नहीं कर पा रही है। विधानसभा चुनाव परिणाम आए तीन महीने से अधिक समय बीत चुका है। एक शीतकालीन सत्र समाप्त हो गया और बजट सत्र भी आधा गुजर चुका है, लेकिन पार्टी अब तक औपचारिक रूप से नेता का ऐलान नहीं कर सकी है।

‘टूट’ का डर बना बड़ी वजह

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती विधायकों की एकजुटता बनाए रखना है। माना जा रहा है कि संभावित टूट की आशंका के कारण आलाकमान किसी एक नाम पर अंतिम मुहर लगाने से पहले सभी पहलुओं पर गहन मंथन कर रहा है।

23 जनवरी को राहुल गांधी ने दिल्ली में पार्टी विधायकों से मुलाकात कर उनसे दूसरी पार्टी में न जाने का भरोसा लिया था। इसके बाद प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू की मौजूदगी में पटना स्थित सदाकत आश्रम में बैठक हुई, जहां विधायकों ने नेता चयन का अधिकार आलाकमान को सौंप दिया। उस बैठक के बाद जल्द घोषणा की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन फैसला टलता गया।

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अंदरूनी कवायद जारी

प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने भी पटना में विधायकों के साथ डिनर बैठक कर सामंजस्य बनाने की कोशिश की। वरिष्ठ विधायक मनोहर प्रसाद सिंह को समन्वय की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन सर्वसम्मति बनती नजर नहीं आई।

सूत्रों के अनुसार, छह विधायकों में से चार नामों पर ही गंभीरता से विचार संभव है। अबिदुर रहमान ने स्वास्थ्य कारणों से खुद को दौड़ से अलग बताया है, जबकि कमरुल होदा को लेकर राजनीतिक पृष्ठभूमि पर कुछ नेताओं की हिचकिचाहट है। वरिष्ठता के आधार पर मनोहर प्रसाद सिंह का नाम चर्चा में रहा, लेकिन जातीय समीकरण उन्हें मजबूत दावेदार नहीं बनाते। ऐसे में अभिषेक रंजन, सुरेंद्र प्रसाद और मनोज विश्वास के नामों पर चर्चा जारी है, हालांकि अंतिम सहमति अब भी दूर बताई जा रही है।

सोमवार की बैठक पर टिकी नजर

सोमवार को कृष्णा अल्लावरू के पटना दौरे के दौरान ‘संगठन सृजन अभियान’ को लेकर बैठक प्रस्तावित है। पार्टी नेतृत्व इसे संगठनात्मक मजबूती की दिशा में अहम कदम बता रहा है, लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर विधायक दल के नेता की संभावित घोषणा पर टिकी है।

प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम का दावा है कि सभी विधायक एकजुट हैं और जल्द ही नेता के नाम का ऐलान किया जाएगा। हालांकि, जब तक आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक सियासी अटकलों का दौर जारी रहने की संभावना है।

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