CBSE की सफाई से संतुष्ट नहीं मोदी सरकार, चेयरमैन-सेक्रेटरी हटाए गए; जांच समिति गठित

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: नई दिल्ली, 02 जून। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम और उससे जुड़े विवादों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने CBSE के चेयरमैन और सचिव का तबादला कर दिया है। साथ ही OSM प्रणाली, टेंडर प्रक्रिया और पुनर्मूल्यांकन व्यवस्था में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय ने CBSE की ओर से अब तक दी गई सफाई को पर्याप्त नहीं माना है। मंत्रालय ने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से संबंधित खरीद प्रक्रिया और टेंडर आवंटन की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसके अलावा री-इवैल्यूएशन पोर्टल में सामने आई तकनीकी और सुरक्षा संबंधी खामियों की भी जांच कराई जा रही है।

मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि मामले में जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने पूरे प्रकरण की समीक्षा के लिए एक नई समिति गठित करने का भी निर्णय लिया है।

विवाद की शुरुआत OSM प्रणाली से जुड़े टेंडर को लेकर हुई थी। आरोप लगाए गए कि निविदा प्रक्रिया के दौरान पात्रता और तकनीकी मानदंडों में बदलाव किए गए, जिसके बाद हैदराबाद की एक कंपनी को ठेका मिला। इसके बाद परीक्षा परिणाम और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान छात्रों की ओर से कई शिकायतें सामने आईं।

छात्रों ने उत्तरपुस्तिकाओं के स्कैन में त्रुटियां, धुंधली कॉपियां, पन्नों के गायब होने और पुनर्मूल्यांकन पोर्टल में तकनीकी समस्याओं की शिकायत की। इन मामलों के सार्वजनिक होने के बाद विपक्षी नेताओं और शिक्षा विशेषज्ञों ने टेंडर प्रक्रिया और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

हालांकि CBSE ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि टेंडर का आवंटन सामान्य वित्तीय नियमों और निर्धारित खरीद प्रक्रिया के तहत किया गया है। इसके बावजूद मंत्रालय ने मामले की गहन जांच कराने का फैसला किया है।

सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह भी देखा जाएगा कि उत्तरपुस्तिकाओं और परीक्षा रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण, डेटा भंडारण और साइबर सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई संरचनात्मक कमी तो नहीं है। मंत्रालय का मानना है कि यदि ऐसी कमियां पाई जाती हैं तो भविष्य में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। फिलहाल जांच समिति के गठन के बाद मंत्रालय की रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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