NEWSPRडेस्क: देश की आज़ादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ने वाले अमर शहीद भगत सिंह का नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। लेकिन राजधानी पटना से सामने आई एक तस्वीर ने व्यवस्था और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह तस्वीर पटना के गांधी मैदान स्थित करगिल चौक के पास बने भगत सिंह चौक की है, जहां शहीद भगत सिंह की प्रतिमा तो स्थापित है, लेकिन जिस परिसर में यह प्रतिमा लगी है उसकी हालत बेहद बदहाल है। टूटी-फूटी बाउंड्री, चारों ओर बिखरी शराब की खाली बोतलें और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा—ये दृश्य न्यूज पीआर के कैमरे में कैद हुए हैं, जो किसी को भी झकझोर कर रख देने वाले हैं।
एक ओर सरकार पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थलों के सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, वहीं देश की आज़ादी के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद की स्मृति स्थल उपेक्षा का शिकार बनी हुई है।
गौरतलब है कि जुलाई 2000 में इस पार्क में तत्कालीन सांसद रंजन प्रसाद के सौजन्य से भगत सिंह की प्रतिमा स्थापित की गई थी। इसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने किया था, जिसमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि शामिल हुए थे।
आज स्थिति यह है कि पास का करगिल स्थल तो चमचमाता नजर आता है, लेकिन ठीक बगल में स्थित शहीद भगत सिंह चौक बदहाली का प्रतीक बन गया है। सवाल यह है कि क्या हमारे शहीद सिर्फ भाषणों और समारोहों तक ही सीमित रह गए हैं? अब जरूरत है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस ओर गंभीरता से ध्यान दें और शहीदों के सम्मान को सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी उतारें।