NEWS PR डेस्क: राजधानी पटना की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल होने जा रही है। न्यू बाईपास पर बिहार का पहला एट-ग्रेड कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। अनीसाबाद से दीदारगंज के बीच बनने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना में ट्रैफिक को दो अलग-अलग स्तरों पर संचालित करने की योजना है। इससे न्यू बाईपास पर लगने वाले जाम और भारी वाहनों के दबाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

13.14 किमी लंबा होगा एट-ग्रेड कॉरिडोर
अनीसाबाद से दीदारगंज के बीच बनने वाला एट-ग्रेड कॉरिडोर करीब 13.14 किलोमीटर लंबा होगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 8,456 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत इसका डबल-लेयर ट्रैफिक सिस्टम होगा।
इसके तहत मौजूदा 4 लेन सड़क नीचे रहेगी, जबकि इसके ऊपर 6 लेन की एलिवेटेड सड़क बनाई जाएगी। एलिवेटेड रोड का इस्तेमाल मुख्य रूप से भारी वाहनों के लिए किया जाएगा, जबकि स्थानीय और छोटे वाहनों की आवाजाही नीचे की सड़क और सर्विस रोड से होगी। इस व्यवस्था से भारी और स्थानीय ट्रैफिक को अलग-अलग रास्ता मिलेगा, जिससे न्यू बाईपास पर जाम और ट्रैफिक दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
150 से ज्यादा मोहल्लों को होगा फायदा
न्यू बाईपास पर कॉरिडोर बनने से दक्षिणी पटना के करीब 150 मोहल्लों में रहने वाली लगभग 10 लाख की आबादी को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। कॉरिडोर के शुरू होने के बाद अनीसाबाद, सरिस्ताबाद, 90 फीट, पुराना बस अड्डा, अशोक नगर, भूतनाथ, पहाड़ी और कर्मलीचक जैसे प्रमुख इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम हो सकता है।
वहीं, गुरु गोविंद सिंह लिंक पथ और दीदारगंज के प्रमुख जंक्शनों पर भी वाहनों की आवाजाही पहले की तुलना में आसान होने की उम्मीद है। इससे इन इलाकों में बार-बार लगने वाले जाम से लोगों को राहत मिल सकती है और दैनिक आवागमन ज्यादा सुगम हो सकता है।
22 किलोमीटर की सर्विस रोड और 2 फ्लाईओवर
यह परियोजना केवल एलिवेटेड रोड तक सीमित नहीं रहेगी। इसके तहत सड़क के दोनों ओर कुल 22 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड बनाई जाएगी। इसके अलावा 10 रैंप और 2 फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। 3 छोटे पुल और 4 अंडरपास भी प्रोजेक्ट का हिस्सा होंगे। पटना-गया रेल लाइन पर 8 लेन का रेलवे ओवरब्रिज यानी ROB भी तैयार किया जाएगा।
जलजमाव से भी मिलेगी राहत
न्यू बाईपास के आसपास जलजमाव की समस्या को देखते हुए परियोजना में ड्रेनेज सिस्टम को भी शामिल किया गया है। इसके तहत 5 किलोमीटर से अधिक लंबी आधुनिक ड्रेनेज प्रणाली विकसित की जाएगी। इससे बारिश के दौरान मुख्य सड़क और आसपास के इलाकों में पानी जमा होने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
भारी और स्थानीय ट्रैफिक के लिए अलग-अलग रास्ते
एट-ग्रेड कॉरिडोर में ट्रैफिक को दो स्तरों पर व्यवस्थित किया जाएगा। भारी वाहन ऊपर बनने वाली एलिवेटेड सड़क से गुजरेंगे, जबकि स्थानीय वाहनों के लिए नीचे की सड़क और सर्विस रोड उपलब्ध रहेगी। इस व्यवस्था से भारी वाहनों और स्थानीय ट्रैफिक के बीच टकराव कम करने के साथ-साथ बाईपास के किनारे बसे मोहल्लों के लोगों की आवाजाही को भी आसान बनाने का लक्ष्य है।
सड़क सुरक्षा पर भी रहेगा जोर
परियोजना का एक अहम पहलू सड़क सुरक्षा है। बाईपास से सटे इलाकों के लोगों को मुख्य सड़क पर भारी वाहनों के बीच से गुजरने की जरूरत कम होगी। अलग-अलग ट्रैफिक लेन और सर्विस रोड के कारण यातायात ज्यादा व्यवस्थित हो सकता है। इससे सड़क हादसों की आशंका को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
कच्ची दरगाह-बिदुपुर महासेतु से बढ़ेगा महत्व
कच्ची दरगाह-बिदुपुर 6 लेन महासेतु के चालू होने के बाद इस कॉरिडोर की उपयोगिता और बढ़ने की संभावना है। बालू और अन्य सामान से लदे भारी वाहन इस रूट से आगे निकल सकेंगे। इससे गांधी सेतु और आरा-छपरा सेतु पर ट्रैफिक का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।
उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी होगी बेहतर
नए कॉरिडोर से पटना की कनेक्टिविटी के साथ-साथ उत्तर बिहार के कई प्रमुख शहरों तक माल ढुलाई को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय और दरभंगा की ओर जाने वाले मालवाहक वाहनों की आवाजाही ज्यादा आसान और तेज हो सकती है। इसका सीधा असर व्यापार और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था पर भी पड़ने की उम्मीद है।
पहले तैयार होगी DPR, फिर आगे बढ़ेगी निर्माण प्रक्रिया
फिलहाल इस महत्वाकांक्षी परियोजना की डीपीआर (Detailed Project Report) तैयार की जाएगी। डीपीआर के बाद निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पथ निर्माण मंत्री ईं. कुमार शैलेंद्र के अनुसार, यह परियोजना केवल एक एलिवेटेड सड़क बनाने की योजना नहीं है, बल्कि भविष्य के ग्रेटर पटना की ट्रैफिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही व्यापक योजना है। इसका उद्देश्य शहर के यातायात को व्यवस्थित करना और लंबे समय के लिए जाम की समस्या का समाधान करना है।