बिहार में विधायक निधि बढ़ाने की मांग पर हंगामा, यूपी-दिल्ली-राजस्थान से तुलना तेज

Amit Singh
- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

NEWS PR डेस्क: पटना। बिहार विधानसभा में सोमवार को विधायक निधि बढ़ाने के मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के कई सदस्य एकजुट दिखे। भाजपा विधायक प्रमोद कुमार ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए मांग उठाई कि बढ़ती महंगाई और निर्माण सामग्री की कीमतों को देखते हुए ‘मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना’ के तहत मिलने वाली राशि में इजाफा किया जाए। वर्तमान में बिहार के विधायकों को सालाना 4 करोड़ रुपये मिलते हैं।

बहस के दौरान सदन में तीखी नोकझोंक भी हुई। प्रमोद कुमार ने दलील दी कि पड़ोसी राज्यों में विधायकों को बिहार से अधिक फंड मिलता है, इसलिए यहां भी समान सुविधा होनी चाहिए। इस मुद्दे पर पक्ष-विपक्ष के कई सदस्य खड़े हो गए और सरकार से पुनर्विचार की मांग की। हालांकि सरकार की ओर से संकेत मिला कि फिलहाल तत्काल बढ़ोतरी पर विचार नहीं है और भविष्य में सांसद निधि बढ़ने की स्थिति में इस पर निर्णय लिया जा सकता है।

यूपी मॉडल का हवाला

विधायकों ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2022 में विधायक निधि 3 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई थी। इससे पहले 2020 में इसे 2 करोड़ से 3 करोड़ किया गया था और 2019 में 1.5 करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ किया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा चरणबद्ध तरीके से निधि बढ़ाने का हवाला देते हुए बिहार के विधायकों ने कहा कि विकास कार्यों की गति बनाए रखने के लिए पर्याप्त संसाधन जरूरी हैं।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

दिल्ली और राजस्थान की तस्वीर

तुलना में दिल्ली का भी जिक्र हुआ। दिल्ली में पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार ने विधायक निधि को 10 करोड़ से बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये कर दिया था, हालांकि वर्तमान सरकार ने इसे घटाकर 5 करोड़ कर दिया है। वहीं राजस्थान में वर्ष 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट सत्र के दौरान विधायक निधि को 2.5 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया था, जिसे सत्ता और विपक्ष दोनों का समर्थन मिला था।

सरकार का रुख

बिहार सरकार ने फिलहाल यह संकेत दिया है कि मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए तत्काल कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। सरकार का कहना है कि संसाधनों की उपलब्धता और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर ही भविष्य में कोई कदम उठाया जाएगा। हालांकि, सदन में जिस तरह सभी दलों के विधायक इस मुद्दे पर एक सुर में दिखे, उससे साफ है कि आने वाले समय में विधायक निधि बढ़ाने का मुद्दा राजनीतिक और वित्तीय बहस का अहम केंद्र बना रहेगा।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →
Share This Article