नदी पार कर वोट डालने निकले बिहपुर के मतदाता — कठिन हालात में भी लोकतंत्र के जज़्बे को सलाम

Jyoti Sinha
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में भागलपुर जिले के बिहपुर विधानसभा क्षेत्र ने लोकतंत्र की एक मिसाल कायम की। यहां के अठगामा और दियारा इलाकों के ग्रामीणों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को मात देते हुए नाव से नदी पार कर मतदान किया। मतदाताओं के इस जोश ने साबित कर दिया कि “जहां चाह, वहां राह।”

नदी पार कर वोट तक का सफर:
सुबह की पहली किरण के साथ ही अठगामा और दियारा शहजादपुर गांवों के लोग नावों में सवार होकर मतदान केंद्रों की ओर निकल पड़े। रास्ते में जलभराव और कीचड़ की कोई परवाह किए बिना ग्रामीण समूहों में सिर्फ मतदान के अधिकार का उपयोग करने जा रहे थे।
मध्य विद्यालय चौहदी मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए नाव ही एकमात्र साधन थी, लेकिन किसी ने इसे रुकावट नहीं बनने दिया।
बुजुर्गों से लेकर महिलाओं तक, सभी ने एक स्वर में कहा — “वोट देना हमारा अधिकार ही नहीं, हमारा कर्तव्य भी है।”

स्थानीय मतदाता रामप्रवेश यादव ने बताया, “हर चुनाव में हमें नाव से ही जाना पड़ता है, लेकिन इससे हमारा उत्साह कभी कम नहीं होता। हमें पता है कि लोकतंत्र में हमारी भागीदारी जरूरी है।”

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940 मतदाताओं का ‘नदी–पैदल–फिर नदी’ वाला सफर:
गोलोक कोडर ग्राम पंचायत के मजर, पचीसा, बरार, कोनी और मेड़ई गांवों के करीब 940 मतदाता पहले शारदा नदी पार करते हैं, फिर दो किलोमीटर कीचड़ भरे रास्ते पर पैदल चलते हैं, और फिर घाघरा नदी पार कर मतदान केंद्र तक पहुंचते हैं।
यह सफर आसान नहीं, लेकिन इन ग्रामीणों की लोकतंत्र के प्रति आस्था और जिम्मेदारी इस यात्रा को सार्थक बना देती है।

प्रशासन की मुस्तैदी:
स्थानीय प्रशासन की ओर से नावों की व्यवस्था, सुरक्षा बलों की तैनाती और अधिकारी स्तर पर निगरानी की गई। बीडीओ और ब्लॉक अधिकारी खुद मौके पर मौजूद रहे ताकि कोई भी मतदाता मतदान से वंचित न रह जाए।

बिहपुर — लोकतंत्र का जीवंत प्रतीक:
बिहपुर का दियारा क्षेत्र भले ही नदियों और जलभराव से घिरा हो, लेकिन मंगलवार को जब नावों में सवार ग्रामीण मतदान केंद्रों तक पहुंचे, तो यह दृश्य लोकतंत्र की सच्ची भावना को दर्शा रहा था।
इन मतदाताओं का यह जज़्बा बताता है कि रास्ता चाहे नदी से गुज़रे या कीचड़ से, वोट देना उनके लिए सिर्फ अधिकार नहीं बल्कि लोकतंत्र के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।

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