बिहार में जमीन खरीदने वालों के लिए बड़ी सुविधा, रजिस्ट्री से पहले 10 दिन में मिलेगी जमीन की आधिकारिक जांच रिपोर्ट

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना,11 जुलाई। बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने नई व्यवस्था लागू कर दी है। 11 जुलाई 2026 से प्रभावी इस व्यवस्था के तहत अब कोई भी व्यक्ति जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले संबंधित भूमि की कानूनी और राजस्व स्थिति की आधिकारिक रिपोर्ट प्राप्त कर सकेगा। इस पहल का उद्देश्य जमीन से जुड़े विवादों, धोखाधड़ी और लंबे कानूनी मुकदमों पर रोक लगाना है।

नई व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई खरीदार जमीन की स्थिति जानने के लिए आवेदन करता है, तो संबंधित अंचल अधिकारी (सीओ) या राजस्व अधिकारी को अधिकतम 10 दिनों के भीतर जांच पूरी कर ऑनलाइन रिपोर्ट उपलब्ध करानी होगी। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट होगा कि संबंधित जमीन पर कोई विवाद, बंधक (लोन), या अन्य कानूनी अड़चन तो नहीं है।

राज्य में लंबे समय से ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें एक ही जमीन को कई लोगों के नाम बेच दिया जाता है। ऐसे मामलों में खरीदारों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अब तक जमीन की वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाना आम लोगों के लिए आसान नहीं था और उन्हें अक्सर बिचौलियों या अपुष्ट जानकारी पर निर्भर रहना पड़ता था।

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नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उप निबंधन महानिरीक्षक संजय कुमार ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रत्येक आवेदन पर जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए, ताकि खरीदारों को समय पर प्रमाणिक जानकारी मिल सके।

वर्तमान में बिहार में जमीन का निबंधन पूरी तरह ई-निबंधन सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जा रहा है। इसी डिजिटल व्यवस्था के साथ अब भूमि सत्यापन की सुविधा भी जोड़ी गई है। इसके लिए सभी अंचल अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है तथा उनके लॉगिन क्रेडेंशियल सक्रिय कर दिए गए हैं।

इस नई प्रणाली के लागू होने से लोगों को सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और निर्धारित समय के भीतर सरकारी स्तर पर सत्यापित रिपोर्ट उपलब्ध हो जाएगी। इससे विवादित जमीन की खरीद की संभावना कम होगी और भविष्य में दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) जैसी प्रक्रियाएं भी अधिक आसान और सुगम बनने की उम्मीद है।

सरकार का मानना है कि यह पहल जमीन खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ भूमि विवादों और धोखाधड़ी के मामलों में भी उल्लेखनीय कमी लाने में मददगार साबित होगी।

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