बिहार में यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम की मॉनिटरिंग शुरू! आपत्तिजनक वीडियो और सामग्री पर साइबर टीम लेगी एक्शन

Puja Srivastav
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NEWSPR डेस्क। राजधानी पटना के एक आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में सरकार फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की जाने वाली आपत्तिजनक सामग्री पर नियमों को कड़ा करने की तैयारी कर रही है। एक विशेष टीम का गठन किया गया है, जो पोस्ट की निगरानी करेगी और आपत्तिजनक या अश्लील वीडियो पोस्ट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। यह पहल उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी के निर्देशों के बाद शुरू की गई है। आर्थिक अपराध इकाई ने साइबर डिवीजन को अभद्र भाषा, अश्लील सामग्री, सांप्रदायिक पोस्ट, अवैध हथियार प्रदर्शन, साथ ही एआई-जनरेटेड और डीपफेक वीडियो की निगरानी का जिम्मा सौंपा है।

ईओयू के एसपी (साइबर) विनय तिवारी को इस पहल का प्रभारी बनाया गया है। जिलों में तैनात सभी डीएसपी को ऐसे मामलों की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नामित किया गया है। जिला डीएसपी (साइबर) सभी आपत्तिजनक या अश्लील पोस्टों की दैनिक रिपोर्ट आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) को देंगे। अपमानजनक या आपत्तिजनक भाषा, अश्लील वीडियो या पोस्ट, सांप्रदायिक या जाति आधारित सामग्री, वीडियो में अवैध हथियारों का प्रदर्शन, एआई-जनरेटेड और डीपफेक वीडियो पर नजर रखी जाएगी। ऑनलाइन आपत्तिजनक सामग्री की पहचान करना और उस पर नज़र रखना; संबंधित कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई करना; मामलों और कार्रवाइयों का विस्तृत रिकॉर्ड रखना; जिला साइबर अधिकारियों और ईओयू के बीच समन्वय सुनिश्चित करना शामिल होगा।

सोशल मीडिया का सुरक्षित और ज़िम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना शामिल होगा। नागरिकों को उत्पीड़न, दुर्व्यवहार या आपत्तिजनक सामग्री से बचाना। दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों के लिए एआई/डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग को रोकना शामिल होगा। आपत्तिजनक या अश्लील सामग्री पोस्ट करने पर अब जुर्माना या कारावास हो सकता है। ऑनलाइन दुर्व्यवहार या उत्पीड़न के प्रति कोई सहनशीलता नहीं। उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें दैनिक निगरानी और रिपोर्टिंग शामिल है। महिला छात्राओं को उत्पीड़न से बचाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में अभया ब्रिगेड का गठन भी किया गया है। सोशल मीडिया पर जवाबदेही को मजबूत करना और बिहार भर में डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा देना।

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गृह मंत्री की चेतावनी के बाद यह कार्रवाई की गई है कि ऑनलाइन अपमानजनक या आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने वाले किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान हुई घटनाओं का हवाला दिया है, जब जाति-आधारित और आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुए थे, जिसके कारण कड़ी निगरानी की आवश्यकता महसूस हुई। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने से अब गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं, और टीम का लक्ष्य ऑनलाइन जवाबदेही और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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