NEWS PR डेस्क: बिहार में प्रस्तावित पंचायत आम चुनाव 2026 को लेकर राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार ने तय किया है कि इस बार पंचायत चुनाव के लिए किसी भी तरह का नया परिसीमन नहीं किया जाएगा। यानी वार्ड, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की सीमाएं पहले जैसी ही बनी रहेंगी। ऐसे में वर्ष 2026 में पंचायतीराज संस्थाओं के लगभग ढाई लाख पदों पर होने वाले चुनाव 2021 के परिसीमन के आधार पर ही कराए जाएंगे।
सरकार के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि चुनाव क्षेत्रों की भौगोलिक संरचना में कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि, परिसीमन यथावत रहेगा, लेकिन आरक्षण व्यवस्था को नए सिरे से तय किया जाएगा। इस प्रक्रिया को पूरा करने की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपी गई है। आयोग जल्द ही आरक्षण रोस्टर निर्धारण की कार्यवाही शुरू करेगा।
निर्वाचन आयोग के सूत्रों के मुताबिक, आरक्षण तय करने के लिए सभी जिलों से राजस्व ग्रामों के वार्डवार आंकड़े मंगाए जाएंगे। इन आंकड़ों में आबादी और मौजूदा निर्वाचित पदों की संख्या शामिल होगी। प्राप्त जानकारी का मिलान आयोग के केंद्रीय डेटा बैंक से किया जाएगा, जिसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस पद पर कौन-सा आरक्षण लागू होगा।
गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों से प्रखंड मुख्यालयों में यह चर्चा तेज थी कि पंचायत चुनाव से पहले नए वार्ड और पंचायतों का गठन किया जा सकता है। इस अफवाह के चलते बड़ी संख्या में लोग निर्वाचन आयोग और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहे थे। अब आयोग ने साफ कर दिया है कि इस तरह की किसी भी योजना पर विचार नहीं किया जा रहा है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि पंचायत चुनाव सितंबर से नवंबर के बीच विभिन्न चरणों में कराए जा सकते हैं और पूरी प्रक्रिया दिसंबर से पहले पूरी करना अनिवार्य होगा। आयोग अब उन तत्वों के खिलाफ कार्रवाई पर भी विचार कर रहा है, जो बिना तथ्य के भ्रामक सूचनाएं फैलाकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं।
बता दें कि पंचायत परिसीमन एक कानूनी प्रक्रिया होती है, जिसके तहत जनसंख्या के आधार पर पंचायतों और वार्डों की सीमाएं तय की जाती हैं, ताकि सभी निर्वाचन क्षेत्रों में आबादी का संतुलन बना रहे। लेकिन समय की कमी और प्रशासनिक व्यावहारिकता को देखते हुए इस बार सरकार ने परिसीमन में बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है।