अरवल का बेलखारा बना विकास की मिसाल, पंकज रंजन कुशवाहा के प्रयासों से बदली गांव की तस्वीर

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: अरवल जिला अंतर्गत बेलखारा गांव एक बार फिर अपने ऐतिहासिक और सामाजिक योगदान को लेकर चर्चा में है। कभी अंग्रेजी शासन के दौर में एक स्टेट के रूप में पहचाने जाने वाला यह गांव आज सामाजिक सेवा, भूदान और विकास कार्यों की मिसाल बनता जा रहा है। इस बदलाव के केंद्र में हैं समाजसेवी एवं जदयू शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज रंजन कुशवाहा और उनका परिवार।

बेलखारा गांव की तस्वीर बदलने में पंकज रंजन कुशवाहा के परिवार द्वारा किया गया भूदान एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। गांव में खेल मैदान के निर्माण के लिए उनके परिवार ने एक एकड़ 28 डिसमिल भूमि दान की है। यह भूदान गांव के युवाओं और बच्चों को खेल एवं शारीरिक विकास का अवसर प्रदान करेगा। भूमि दान को ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देखा जा रहा है।

भूदान आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1951 में गांधीवादी विचारक विनोबा भावे द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य भूमिहीनों को जमीन उपलब्ध कराना था। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पंकज रंजन कुशवाहा के परिवार ने बेलखारा गांव में भूदान कर सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया है।

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खेल मैदान का नाम पंकज रंजन कुशवाहा के पिता स्वर्गीय प्रोफेसर अंबुज कुमार वर्मा के दादाजी एवं पंकज कुशवाहा के परदादा स्वर्गीय प्रयाग दत्त के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया है। प्रयाग दत्त का जन्म वर्ष 1878 में बेलखारा गांव में हुआ था। वे अपने समय के दयालु जमींदार, समाज सुधारक और शिक्षाप्रेमी व्यक्तित्व थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में गांव और समाज के लिए बहुत योगदान दिया। गांव में स्कूल और अस्पताल के लिए भूमि भी दान की, जिसकी प्रशंसा पूरे देश में की जाती है।

प्रयाग दत्त ने वर्ष 1913 में बेलखारा गांव में बिहार का पहला और भारत का दूसरा कुशवाहा सम्मेलन आयोजित कर इतिहास रच दिया था। इस सम्मेलन में देश की कई नामी-गिरामी हस्तियों ने शिरकत की थी। इस आयोजन का उद्देश्य समाज में शिक्षा का प्रचार, सामाजिक एकता और आर्थिक सशक्तिकरण था। सम्मेलन के दौरान कुशवाहा समाज के विभिन्न वर्गों के बीच रोटी-बेटी के संबंध स्थापित करने और कुरीतियों को दूर करने के प्रस्ताव पारित किए गए थे।

प्रयाग दत्त

समाज सेवा की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं पंकज रंजन कुशवाहा

पंकज रंजन कुशवाहा अपने परदादा प्रयाग दत्त को आदर्श मानते हैं और उन्हीं के दिखाए रास्ते पर चलते हुए सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। वे हर वर्ग, हर जाति और हर धर्म के लोगों के लिए सामाजिक सरोकारों के साथ खड़े रहते हैं। वर्तमान में वे जनता दल (यूनाइटेड) के शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं।

करीब 18 वर्ष पहले राजनीति में कदम रखने वाले पंकज रंजन कुशवाहा ने अपने पिता स्वर्गीय प्रोफेसर अंबुज कुमार वर्मा से प्रेरणा लेकर सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विकासवादी सोच से प्रभावित होकर वे जदयू से जुड़े। पार्टी ने उनकी कार्यशैली को देखते हुए उन्हें शिक्षा प्रकोष्ठ का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया।

मेडिकल कॉलेज स्थापना की पहल, बेलखारा को मिली बड़ी सौगात

अरवल जिले के लिए एक और बड़ी उपलब्धि तब सामने आई जब मुख्यमंत्री द्वारा जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की घोषणा की गई। इसको लेकर पंकज रंजन कुशवाहा ने 21 अगस्त 2025 को उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को आवेदन देकर बेलखारा गांव में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का आग्रह किया। आवेदन में उन्होंने जमीन का पूरा विवरण भी उपलब्ध कराया था।

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आवेदन को स्वीकार करते हुए जिला प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद अरवल जिला प्रशासन द्वारा भूमि की मापी कर मेडिकल कॉलेज की स्थापना की घोषणा बेलखारा गांव के लिए कर दी गई। इस फैसले से पूरे बेलखारा गांव सहित अरवल जिले के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का आभार जताया।

मेडिकल कॉलेज का नाम प्रयाग दत्त के नाम पर रखने की मांग

स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से आग्रह किया है कि 1913 के ऐतिहासिक कुशवाहा सम्मेलन और समाज सुधारक प्रयाग दत्त के योगदान को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज का नाम स्वर्गीय प्रयाग दत्त के नाम पर रखा जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल कुशवाहा समाज की ऐतिहासिक विरासत को सम्मान मिलेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी।

आज एक बार फिर बेलखारा गांव सुर्खियों में है। वर्ष 1913 में जिस गांव ने सामाजिक एकता और शिक्षा का संदेश दिया था, वही गांव अब शिक्षा, खेल और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। पंकज रंजन कुशवाहा और उनके परिवार का यह प्रयास बेलखारा को अरवल जिले के विकास मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिला रहा है।

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