बाढ़ से निपटने को ‘स्पेस टेक’ का सहारा, बिहार में शुरू होगी सैटेलाइट मॉनिटरिंग

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: हर साल नेपाल से आने वाली नदियां उत्तर बिहार में तबाही मचाती हैं। अब राज्य सरकार ने बाढ़ प्रबंधन के लिए अंतरिक्ष तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है। नई योजना के तहत नेपाल सीमा से सटे जिलों में प्रवेश करने वाली नदियों और जलस्रोतों पर सैटेलाइट के जरिए निगरानी रखी जाएगी, ताकि खतरे का पूर्वानुमान लगाकर समय रहते राहत और बचाव अभियान शुरू किया जा सके।

6960 वर्ग किमी क्षेत्र रहेगा रडार पर

जल संसाधन विभाग की कार्ययोजना में चंपारण से किशनगंज तक का सीमावर्ती इलाका शामिल है। करीब 6960 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को इस निगरानी तंत्र के दायरे में लिया गया है। इसके लिए बिहार सरकार ने National Remote Sensing Centre (NRSC) के साथ समन्वय स्थापित किया है। यह केंद्र सैटेलाइट आधारित रिमोट सेंसिंग डेटा उपलब्ध कराएगा, जिससे कोसी बेसिन समेत नेपाल से आने वाली छोटी-बड़ी नदियों की वास्तविक समय में स्थिति का आकलन किया जा सकेगा।

बिना ‘गेज’ वाले इलाकों पर भी नजर

राज्य के कई हिस्सों में जलस्तर मापने वाले ‘गेज’ उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे क्षेत्रों में अचानक जलस्तर बढ़ने से प्रशासन को देर से जानकारी मिलती है। सैटेलाइट डेटा की मदद से उन इलाकों का भी पूर्वानुमान संभव होगा, जहां अभी तक पारंपरिक निगरानी तंत्र मौजूद नहीं है। इससे उन संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी जहां तटबंध नहीं हैं या निर्माणाधीन हैं।

फ्लैश बाढ़ पर लगेगी रोकथाम की लगाम

नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भारी वर्षा होने पर अचानक जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे सीमावर्ती जिलों में फ्लैश बाढ़ की स्थिति बनती है। नई प्रणाली प्रशासन को यह जानकारी देगी कि कौन-सा जलस्रोत कितनी तेजी से बढ़ रहा है और किन इलाकों में खतरा मंडरा रहा है।

जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के अनुसार, सरकार दीर्घकालीन और अल्पकालीन योजनाओं के तहत आधुनिक तकनीक का उपयोग कर बाढ़ प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना रही है।

राहत और पुनर्वास में तेजी

सैटेलाइट निगरानी से समय रहते अलर्ट जारी किए जा सकेंगे, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत सामग्री की पूर्व-तैयारी और बचाव दलों की तैनाती में तेजी आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रणाली प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो बिहार में हर साल होने वाले जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

राज्य सरकार की यह पहल बाढ़ जैसी पुरानी समस्या से निपटने के लिए तकनीक आधारित समाधान की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

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