NEWS PR डेस्क: पटना, 13 जून। राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के 79वें जन्मदिन समारोह में भोजपुरी गायक छोटू छलिया को कथित तौर पर उपहार में दिए गए हीरे के कंगन को लेकर बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। जनता दल (यूनाइटेड) के विधान पार्षद नीरज कुमार ने आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
नीरज कुमार ने अपने पत्र में कहा है कि जन्मदिन समारोह के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा छोटू छलिया को एक मूल्यवान हीरे का कंगन उपहार स्वरूप दिए जाने की जानकारी सामने आई है। स्वयं गायक ने भी सार्वजनिक रूप से इस उपहार का जिक्र किया है। हालांकि, कंगन की कीमत और उसकी वास्तविक प्रकृति को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
जेडीयू नेता ने ईओयू से मांग की है कि कंगन की वास्तविक बाजार कीमत, उसकी खरीद का स्रोत, भुगतान का तरीका, आय के स्रोत और कर अनुपालन से जुड़े पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कंगन के मूल्य या स्वरूप को लेकर जनता के बीच कोई भ्रामक जानकारी प्रसारित की गई है, तो उस पहलू की भी जांच होनी चाहिए।

अपने पत्र में नीरज कुमार ने राबड़ी देवी से जुड़े पुराने मामलों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि जमीन के बदले नौकरी मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा पहले ही आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है और न्यायालय में आरोप भी तय किए जा चुके हैं। ऐसे में वित्तीय पारदर्शिता और जनहित को ध्यान में रखते हुए इस प्रकरण की भी जांच आवश्यक है।
जेडीयू एमएलसी ने जांच एजेंसियों से कई बिंदुओं पर पड़ताल करने का आग्रह किया है। इनमें कंगन की वास्तविक कीमत का स्वतंत्र मूल्यांकन, खरीद से जुड़े बिल और भुगतान स्रोत की जांच, आयकर कानून के तहत आवश्यक खुलासों की समीक्षा, बेनामी लेन-देन निषेध कानून के संभावित उल्लंघन की जांच तथा जरूरत पड़ने पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कार्रवाई की संभावना शामिल है।
उन्होंने यह भी मांग की है कि मामले में किसी प्रकार की अघोषित संपत्ति, कर चोरी, वित्तीय अनियमितता या जनता के समक्ष भ्रामक प्रस्तुतीकरण के आरोपों की भी जांच की जाए।
इधर, इस पूरे विवाद को लेकर बिहार की राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस मामले में अब तक राबड़ी देवी या राष्ट्रीय जनता दल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में सभी की निगाहें आर्थिक अपराध इकाई पर टिकी हैं कि वह शिकायत पर क्या कदम उठाती है और जांच की दिशा क्या रहती है।
