NEWS PR डेस्क : अमेरिका और इज़रायल के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबरों के बीच भी सत्ता परिवर्तन की संभावना कम मानी जा रही है। वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिका सैन्य कार्रवाई करता है तब भी ईरान की मजबूत सैन्य संरचना और धार्मिक नेतृत्व व्यवस्था को गिराना आसान नहीं होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की संस्थागत ताकतें शासन को स्थिर बनाए रख सकती हैं।
अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर लगातार कई हमले किए, जिनमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई। इस घटना के बाद से मिडिल ईस्ट में तनाव और तेज़ हो गया है।
हमलों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने बार-बार Islamic Republic of Iran में शासन परिवर्तन की बात कही थी, लेकिन वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अभी भी ईरान में सत्ता बदलने की संभावना कम है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बड़े पैमाने पर अमेरिकी सैन्य अभियान भी ईरान की मज़बूत सैन्य ताकत और धार्मिक नेतृत्व व्यवस्था को नहीं हिला पाएगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरान के पादरी और सैन्य संस्थान पावर कंटिन्यूटी बनाए रखने के लिए पहले से ही प्रक्रियाएँ तैयार कर चुके हैं।
यह इंटेलिजेंस असेसमेंट उस समय तैयार किया गया था जब अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी के हमले की योजना बनाई। इसमें विभिन्न परिदृश्यों का मूल्यांकन किया गया, जैसे कि ईरान के नेताओं को निशाना बनाने वाला सीमित अभियान और पूरे नेतृत्व और संस्थागत ढांचे पर बड़ा हमला। एनालिस्टों ने निष्कर्ष निकाला कि अगर खामेनेई भी मारे जाते हैं, तो देश का सिस्टम अभी भी संचालित रहेगा।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने कहा कि राष्ट्रपति Donald Trump और उनकी प्रशासन टीम ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के लक्ष्यों को स्पष्ट किया है। अमेरिका का उद्देश्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं, नेवी, प्रॉक्सी नेटवर्क और न्यूक्लियर कार्यक्रम को रोकना है।
बड़े मीडिया आउटलेट्स जैसे New York Times, Reuters और Wall Street Journal ने भी रिपोर्ट किया है कि अमेरिकी इंटेलिजेंस को शक है कि ईरान का विपक्ष जल्द सत्ता में आ सकता है और इस्लामिक शासन का अंत हो सकता है।