बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली का नया नियम, अब लिखित परीक्षा के आधार पर होगा चयन

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: बिहार के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार के निर्देश के बाद ‘ड्राफ्ट स्टैच्यूट फॉर अपॉइंटमेंट ऑफ असिस्टेंट प्रोफेसर 2025’ तैयार किया गया है। इसके तहत अब शिक्षकों की नियुक्ति लिखित परीक्षा के आधार पर की जाएगी और पूरी चयन प्रक्रिया बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) के माध्यम से संचालित होगी। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से नियुक्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और गुणवत्ता आधारित बनेगी।

ड्राफ्ट के अनुसार चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा को 80 प्रतिशत और इंटरव्यू को 20 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। लिखित परीक्षा 160 अंकों की होगी, जबकि इंटरव्यू 40 अंकों का होगा। यानी कुल चयन 200 अंकों के आधार पर होगा। आयोग तीन घंटे की लिखित परीक्षा आयोजित करेगा, जिसके आधार पर ही अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। लिखित परीक्षा में सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत तथा एससी, एसटी और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए 45 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं।

असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए अभ्यर्थी के पास संबंधित विषय में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री होना अनिवार्य होगा। एससी, एसटी, ईबीसी, बीसी और दिव्यांग अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत अंकों की छूट दी जाएगी। इसके साथ ही नेट, एसएलईटी या सेट परीक्षा उत्तीर्ण होना भी जरूरी होगा। नियुक्ति से पहले राज्य स्तर पर असिस्टेंट प्रोफेसर पात्रता परीक्षा आयोजित की जाएगी।

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ड्राफ्ट के मुताबिक पदों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन जारी किया जाएगा और इसमें डोमिसाइल नीति लागू नहीं होगी। विश्वविद्यालय अपने-अपने विषयों के रिक्त पदों की जानकारी उच्च शिक्षा विभाग को भेजेंगे। इसके बाद विभाग सभी रिक्तियों को समेकित कर आयोग को भेजेगा और आयोग नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करेगा।

नई व्यवस्था में आयु सीमा में भी बदलाव किया गया है। अधिकतम आयु 55 वर्ष से घटाकर 45 वर्ष कर दी गई है, जबकि न्यूनतम आयु 23 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों को सरकार के नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलेगी। लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के अंकों के आधार पर विषयवार मेरिट सूची तैयार की जाएगी। समान अंक होने की स्थिति में लिखित परीक्षा में अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जाएगी, इसके बाद भी बराबरी होने पर अधिक उम्र वाले अभ्यर्थी को वरीयता मिलेगी।

ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने से पहले विश्वविद्यालयों और शिक्षाविदों से सुझाव भी मांगे गए हैं। सुझाव मिलने के बाद अंतिम नियमावली जारी की जाएगी और उसी के आधार पर विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होगी।

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