तकनीकी शिक्षा को उद्योग और रोजगार से जोड़ने पर जोर, मुख्यमंत्री ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 24 जून। बिहार को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को अनुसंधान, नवाचार तथा रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए योजनाबद्ध ढंग से कार्य करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नए विचारों और शोध कार्यों को प्रोत्साहित कर राज्य के तकनीकी संस्थानों को उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में विभागीय सचिव श्री हिमांशु शर्मा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से राज्य के अभियंत्रण महाविद्यालयों एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता, नामांकन, प्लेसमेंट, आधारभूत संरचना, अनुसंधान गतिविधियों तथा विभाग की आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों में चरणबद्ध तरीके से “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों तथा उद्योगों की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता और तकनीकी दक्षता में वृद्धि होगी।

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मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित विज्ञान केंद्रों एवं साइंस पार्कों के साथ अभियंत्रण महाविद्यालयों और पॉलिटेक्निक संस्थानों का बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रति रुचि विकसित करने के लिए विशेष कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाना चाहिए।

तकनीकी शिक्षा के प्रचार-प्रसार को नई दिशा देते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अभियंत्रण महाविद्यालयों एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों की उपलब्धियों, आधुनिक अवसंरचना, प्रयोगशालाओं, प्लेसमेंट रिकॉर्ड तथा छात्र-छात्राओं की सफलता की कहानियों पर आधारित उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो तैयार किए जाएं। इन वीडियो के माध्यम से संस्थानों की विशिष्टताओं को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक छात्र तकनीकी शिक्षा की ओर आकर्षित हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक अभियंत्रण महाविद्यालय एवं पॉलिटेक्निक संस्थान में विद्यार्थियों को रोजगार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के लिए नियमित रूप से कार्यशालाओं, सेमिनारों तथा विशेषज्ञ व्याख्यानों का आयोजन किया जाए। साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों तथा उद्योगों के साथ सहयोग बढ़ाकर विद्यार्थियों को अधिकाधिक औद्योगिक अनुभव उपलब्ध कराया जाए।

अनुसंधान एवं नवाचार को तकनीकी शिक्षा की आधारशिला बताते हुए मुख्यमंत्री ने विभाग को विशेष कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नवीन शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन देकर बिहार को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए गंभीर प्रयास किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने तकनीकी संस्थानों में प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण, उपकरणों के नियमित उन्नयन तथा आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी संस्थानों की वेबसाइट एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म को अद्यतन रखा जाए तथा विद्यार्थियों को सभी आवश्यक जानकारियां ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएं।

बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य में तकनीकी शिक्षकों के प्रशिक्षण एवं क्षमता संवर्द्धन के लिए समर्पित प्रशिक्षण एवं ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने की संभावनाओं पर भी कार्य करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी शिक्षा को रोजगार, उद्यमिता और नवाचार से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने कहा, “हम चाहते हैं कि बिहार के बच्चे बिहार में ही गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा प्राप्त करें और यहीं रोजगार एवं नौकरी के बेहतर अवसर हासिल करें। तकनीकी शिक्षा को उद्योग, रोजगार और नवाचार से जोड़कर राज्य के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।”

बैठक में विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, विभागीय सचि हिमांशु शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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