NEWS PR डेस्क: पटना, 23 मई। बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने नियोजित शिक्षकों को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि 2015-17 और 2017-18 सत्र में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षकों को अब प्रशिक्षित वेतनमान का लाभ केवल तभी मिलेगा, जब वे शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करेंगे।
इस संबंध में विक्रम विरकर ने आधिकारिक आदेश जारी करते हुए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नए नियम को सख्ती से लागू किया जाए। शिक्षा विभाग के अनुसार अब केवल डीएलएड या अन्य प्रशिक्षण प्राप्त कर लेने से प्रशिक्षित वेतनमान का लाभ नहीं दिया जाएगा।

विभाग का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण निर्णय के बाद आया है। “राज्य सरकार एवं अन्य बनाम मनोज कुमार एवं अन्य” मामले में 16 जनवरी 2026 को शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया था, जिसके अनुपालन में शिक्षा विभाग ने यह नई व्यवस्था लागू की है।
नए आदेश के तहत संबंधित सत्रों के प्रशिक्षित शिक्षकों को नियुक्ति की प्रभावी तिथि से प्रशिक्षित वेतनमान तभी मिलेगा, जब वे TET परीक्षा पास करेंगे। यानी अब प्रशिक्षण प्रमाणपत्र के साथ शिक्षक पात्रता परीक्षा की योग्यता भी अनिवार्य कर दी गई है।

शिक्षा विभाग का कहना है कि इस कदम से स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी। विभाग के अनुसार TET परीक्षा शिक्षकों की बुनियादी शैक्षणिक क्षमता और योग्यता की जांच का महत्वपूर्ण माध्यम है, इसलिए प्रशिक्षित वेतनमान को इससे जोड़ा गया है।
हालांकि इस फैसले के बाद शिक्षक संगठनों में नाराजगी भी बढ़ गई है। कई नियोजित शिक्षक संगठनों ने सवाल उठाया है कि वर्षों से कार्यरत शिक्षकों पर नई शर्त लागू करना उचित नहीं है। वहीं कई शिक्षक इसे अपने करियर और वेतनमान के लिए नई चुनौती मान रहे हैं।
इस निर्णय का असर राज्य के हजारों नियोजित शिक्षकों पर पड़ सकता है, खासकर उन शिक्षकों पर जिन्होंने प्रशिक्षण पूरा कर लिया है लेकिन अभी तक TET पास नहीं किया है। शिक्षा विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि आदेश का समय पर अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि आगे किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक समस्या उत्पन्न न हो।