NEWS PR डेस्क: पटना, 08 जून। बिहार सरकार ने राज्य की यातायात व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित, आधुनिक तथा जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ट्रैफिक थानों में पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों की नियुक्ति के लिए नई नीति लागू कर दी गई है, जिसके तहत आयु सीमा, सेवा रिकॉर्ड, प्रशिक्षण और चयन प्रक्रिया के स्पष्ट मानदंड निर्धारित किए गए हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी पुलिसकर्मी की नियुक्ति उसके गृह जिले में नहीं की जाएगी। इसके अलावा यातायात पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से एक-तिहाई पदों पर महिला कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है।
नई व्यवस्था के अनुसार, ट्रैफिक थानों में तैनाती के लिए पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर) की अधिकतम आयु 50 वर्ष तय की गई है। वहीं पुलिस अवर निरीक्षक (एसआई) के लिए 40 वर्ष, सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) और हवलदार के लिए 55 वर्ष तथा सिपाही एवं चालक सिपाही के लिए 35 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा निर्धारित की गई है।

सरकार की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक, ट्रैफिक थानों में पोस्टिंग से पहले संबंधित पुलिसकर्मी के पिछले तीन वर्षों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी। केवल स्वच्छ और संतोषजनक सेवा रिकॉर्ड वाले कर्मियों को ही यातायात इकाइयों में तैनाती का अवसर मिलेगा। साथ ही किसी भी अधिकारी या कर्मी का कार्यकाल एक ही स्थान पर तीन वर्ष से अधिक नहीं होगा।
नई नीति में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत चयन प्रक्रिया के लिए तीन पुलिस उपाधीक्षकों की समिति गठित की जाएगी, जो पात्र उम्मीदवारों का चयन करेगी। चयनित अभ्यर्थियों की सूची से कम से कम 70 प्रतिशत रिक्त पदों को भरा जाएगा, जबकि 15 प्रतिशत अभ्यर्थियों की प्रतीक्षा सूची तैयार की जाएगी, जिसकी वैधता एक वर्ष तक रहेगी।
वर्तमान में बिहार के 12 यातायात जिलों में 15 ट्रैफिक थाने संचालित हैं, जिनके लिए 2,750 पद स्वीकृत हैं। वहीं राज्य सरकार 28 नए ट्रैफिक थानों की स्थापना की दिशा में भी काम कर रही है, जिसके लिए 4,215 अतिरिक्त पदों के सृजन का प्रस्ताव विचाराधीन है।
चयन प्रक्रिया से संबंधित शिकायतों के निपटारे की जिम्मेदारी क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक या पुलिस उप-महानिरीक्षक स्तर के अधिकारियों को सौंपी गई है। साथ ही हर वर्ष 25 अप्रैल तक चयन प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से राज्य की यातायात पुलिसिंग अधिक प्रभावी और पेशेवर बनेगी।
