मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एएनएमएमसीएच) में मेडिकल छात्रों के आंदोलन का असर अब मरीजों पर साफ दिखाई देने लगा है। छात्रों के धरना-प्रदर्शन के चलते लगातार तीसरे दिन भी अस्पताल की ओपीडी सेवा पूरी तरह ठप रही, जिससे इलाज के लिए दूर-दराज से पहुंचे सैकड़ों मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि प्रशासनिक पहल के बाद इमरजेंसी सेवाएं फिर से शुरू करा दी गई हैं, लेकिन ओपीडी अब भी बहाल नहीं हो सकी है।

अस्पताल के कार्यकारी अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2023, 2024 और 2025 बैच के मेडिकल छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर निबंधन (रजिस्ट्रेशन) काउंटर बंद कर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी वजह से पिछले तीन दिनों से ओपीडी सेवाएं बाधित हैं और मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन लगातार छात्रों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। वार्ता के सकारात्मक परिणाम के रूप में आकस्मिक (इमरजेंसी) सेवाएं दोबारा शुरू करा दी गई हैं, लेकिन ओपीडी सेवा अभी भी प्रभावित है।

छात्रों की क्या हैं मांगें?
डॉ. अग्रवाल के अनुसार छात्रों की कई मांगें हैं, जिनमें सबसे प्रमुख मांग हॉस्टल और बेहतर आवासीय सुविधाओं की है। छात्रों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। अस्पताल अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि छात्रावास और कॉलेज से संबंधित मामलों की जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन और प्राचार्य के अधिकार क्षेत्र में आती है। अस्पताल प्रशासन का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को सामान्य बनाए रखना है और इसी दिशा में प्रयास जारी हैं।
स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई रिपोर्ट
अस्पताल प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी स्वास्थ्य विभाग और संबंधित उच्च अधिकारियों को दे दी है। साथ ही छात्रों के साथ लगातार संवाद जारी है ताकि जल्द से जल्द गतिरोध समाप्त हो सके और ओपीडी सेवाएं पुनः शुरू की जा सकें। प्रशासन को उम्मीद है कि वार्ता के जरिए समाधान निकल जाएगा और अस्पताल की सभी स्वास्थ्य सेवाएं जल्द सामान्य हो जाएंगी। फिलहाल सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हो रही है जो नियमित जांच और इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। गया से आशिष कुमार की रिपोर्ट
