NEWS PR डेस्क: पटना, 14 जून। बिहार के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गयाजी, राजगीर और नालंदा में पर्यटकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए पर्यटन विकास परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया है।
रविवार को लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में आयोजित पर्यटन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों का व्यापक विकास आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में चल रही परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
हेलिकॉप्टर और रियायती वायु सेवा की होगी शुरुआत
मुख्यमंत्री ने पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मां मुंडेश्वरी मंदिर, करकटगढ़ जलप्रपात और राजगीर के लिए अनुदानित दर पर हेलिकॉप्टर सेवा शुरू करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही वाल्मीकिनगर के लिए सप्ताहांत में रियायती दर पर वायु सेवा जल्द शुरू करने की बात कही गई।
पर्यटकों को मिलेगी ‘एंड-टू-एंड’ सेवा
बैठक में निर्णय लिया गया कि पर्यटकों को पटना पहुंचने से लेकर उनके गंतव्य तक पहुंचाने और वापस लौटने तक की संपूर्ण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा ‘एंड-टू-एंड’ सेवा शुरू की जाएगी। इससे पर्यटकों को यात्रा, आवास और स्थानीय परिवहन जैसी सुविधाएं एकीकृत रूप से उपलब्ध हो सकेंगी।

विष्णुपद और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर को मिलेगी रफ्तार
मुख्यमंत्री ने विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर परियोजनाओं को शीघ्र अंतिम रूप देकर निर्माण कार्य शुरू करने का निर्देश दिया। उनका कहना था कि इन परियोजनाओं से धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई मिलेगी और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं प्राप्त होंगी।
राजगीर बनेगा आध्यात्मिक शिक्षा का वैश्विक केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजगीर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को देखते हुए इसे “ग्लोबल सेंटर ऑफ स्पिरिचुअल लर्निंग” के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा ताकि देश-विदेश से आने वाले लोगों को बेहतर अनुभव मिल सके।
नालंदा को फिर मिलेगी वैश्विक पहचान
बैठक में नालंदा महाविहार की वैश्विक पहचान को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि नालंदा को वैश्विक ज्ञान और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में पुनर्स्थापित करने के लिए एक विशेष एकीकृत पैकेज तैयार किया जाएगा। साथ ही इसकी विश्व धरोहर पहचान को और सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य होगा।
पीपीपी मॉडल और होमस्टे को मिलेगा बढ़ावा
पर्यटन क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करने, स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विशेष पहल शुरू की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटकों को बिहार की पारंपरिक मेहमाननवाजी से जोड़ने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के लिए होमस्टे नीति को बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
पावापुरी के विकास के लिए बनेगी विशेष योजना
बैठक में पावापुरी जल मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने का भी निर्णय लिया गया। सरकार का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई दिशा देना है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार अध्यात्म, इतिहास और संस्कृति की भूमि है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि गयाजी, राजगीर और नालंदा आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि कॉरिडोर निर्माण, पर्यटन अवसंरचना, हेलिकॉप्टर सेवा और होमस्टे जैसी योजनाओं से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, पर्यटन विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह, बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक नंद किशोर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
