ग्रामीण बिहार में आजीविका क्रांति की तैयारी, 1407 करोड़ रुपये से बदलेंगे लाखों गरीब परिवारों के हालात

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: पटना, 20 जून। बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने जीविका के माध्यम से गरीब परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 1407.15 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। इस राशि का उपयोग गांवों में रोजगार, स्वरोजगार और कौशल विकास कार्यक्रमों के विस्तार पर किया जाएगा।

ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, योजना का मुख्य उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की आय बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। केंद्र और राज्य सरकार की साझेदारी से संचालित इस कार्यक्रम में 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि बिहार सरकार वहन कर रही है।

राज्य के सभी जिलों को उनकी जरूरतों के अनुसार धनराशि आवंटित की गई है। सबसे अधिक राशि पूर्वी चंपारण को 66.36 करोड़ रुपये, गया को 58.99 करोड़ रुपये, पटना को 56.53 करोड़ रुपये, मधुबनी को 51.62 करोड़ रुपये और मुजफ्फरपुर को 39.33 करोड़ रुपये दी गई है।

अधिकारियों का कहना है कि इस निवेश से गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और बड़ी संख्या में लोगों का दूसरे राज्यों की ओर पलायन कम होगा। स्थानीय स्तर पर आय के साधन विकसित होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और बाजारों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण भी है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सीधे वित्तीय सहायता मिलने से जीविका दीदियां अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकेंगी और परिवार तथा समाज में उनकी भागीदारी बढ़ेगी।

विभाग ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए भी विशेष प्रावधान किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन वर्गों तक सरकारी सहायता सीधे पहुंचाने के लिए अलग से राशि निर्धारित की गई है, जिससे सामाजिक और आर्थिक असमानता को कम करने में मदद मिलेगी।

ग्रामीण विकास विभाग का दावा है कि जीविका मॉडल पहले से ही सकारात्मक परिणाम दे रहा है। अब बड़े पैमाने पर फंडिंग मिलने से ग्रामीण बिहार में रोजगार, आय और सामाजिक विकास के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

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