NEWS PR डेस्क: केंद्र सरकार ने देश में ग्रीन यूरिया उत्पादन को बढ़ावा देने और कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उर्वरक विभाग ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी पीडीआईएल के सहयोग से देश में ग्रीन यूरिया प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत नोएडा स्थित पीडीआईएल मुख्यालय में उच्च स्तरीय प्री-एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (Pre-EOI) बैठक आयोजित की गई, जिसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कई प्रमुख कंपनियों ने भाग लिया।
बैठक में एनटीपीसी, भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI), प्रमुख उर्वरक कंपनियों, ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण से जुड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया। सरकार का उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन और कार्बन कैप्चर तकनीक के जरिए पर्यावरण-अनुकूल यूरिया उत्पादन को बढ़ावा देना है।
सरकार ने इस पहल को सफल बनाने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वित सहयोग की रणनीति तैयार की है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ग्रीन ऊर्जा अवसंरचना के विकास के लिए 19,744 करोड़ रुपये का निवेश करेगा, जबकि उर्वरक विभाग ग्रीन अमोनिया को देश की उर्वरक उत्पादन प्रणाली में शामिल करने की रूपरेखा तैयार करेगा।

ग्रीन यूरिया उत्पादन को आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाने के लिए सरकार अलग मूल्य निर्धारण प्रणाली और वित्तीय प्रोत्साहन पर भी काम कर रही है। भारतीय सौर ऊर्जा निगम पहले ही ग्रीन अमोनिया की खरीद के लिए निविदा जारी कर चुका है और उत्पादकों को 10 वर्षों तक प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है, जिससे निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
बैठक में आंध्र प्रदेश के पुदिमाडाका स्थित 150 टन प्रतिदिन क्षमता वाले ग्रीन यूरिया पायलट प्लांट को तकनीकी मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया। यह परियोजना ग्रीन हाइड्रोजन, कार्बन कैप्चर और उन्नत यूरिया उत्पादन तकनीक के समन्वय का उदाहरण मानी जा रही है।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2070 तक ‘नेट ज़ीरो’ उत्सर्जन हासिल करना है। इसी दिशा में ग्रीन यूरिया परियोजना को ऊर्जा सुरक्षा, उर्वरक आत्मनिर्भरता और जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से यूरिया आयात पर निर्भरता घटेगी, स्वच्छ तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय कृषि को हरित एवं टिकाऊ आधार मिलेगा।
