बिहार में छात्राओं की सुरक्षा होगी और मजबूत, अब 2500 स्कूटी सवार महिला सिपाही करेंगी निगरानी

गर्ल्स हॉस्टल, लॉज और कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए।

Rashmi Tiwari
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NEWS PR डेस्क:बिहार सरकार ने स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थानों और गर्ल्स हॉस्टलों में पढ़ने वाली छात्राओं की सुरक्षा को और मजबूत बनाने का बड़ा फैसला लिया है। राज्य में संचालित ‘अभया ब्रिगेड’ का विस्तार करते हुए अब 1500 की बजाय 2500 स्कूटी सवार महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी, जो छात्राओं की सुरक्षा और मनचलों पर निगरानी रखेंगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अब तक अभया ब्रिगेड ने 405 मनचलों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिनमें 11 मामलों में प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की गई है।


गर्ल्स हॉस्टल और कोचिंग संस्थानों के लिए नए दिशा-निर्देश
सरकार ने राज्य के सभी गर्ल्स हॉस्टल, लॉज और कोचिंग संस्थानों में रहने एवं पढ़ाई करने वाली छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन संस्थानों को सुरक्षा संबंधी मानकों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। नए नियमों के तहत परिसर में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे लगाना और आने-जाने वाले सभी आगंतुकों का पहचान पत्र (आईडी प्रूफ) सहित पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। इसके अलावा छात्राओं की शैक्षणिक प्रगति की जानकारी नियमित रूप से अभिभावकों को उपलब्ध करानी होगी। यदि कोई छात्रा देर से गर्ल्स हॉस्टल, लॉज या कोचिंग संस्थान लौटती है, तो इसकी सूचना भी तत्काल उसके अभिभावकों को देना संस्थान की जिम्मेदारी होगी।
साइबर सुरक्षा पर भी रहेगा विशेष जोर
इतना ही नहीं सरकार ने इंटरनेट, सोशल मीडिया, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दुरुपयोग से जुड़े खतरों के प्रति छात्राओं को जागरूक करने का भी निर्णय लिया है। इसके लिए राज्य के सभी कन्या विद्यालयों और महाविद्यालयों में समाज कल्याण विभाग, महिला थाना और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
महिला हेल्पडेस्क का बढ़ा दायरा
राज्य के सभी थानों में संचालित महिला हेल्पडेस्क की जिम्मेदारियों का भी विस्तार किया गया है। अब यहां महिलाओं के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों और ट्रांसजेंडर समुदाय की समस्याओं को भी प्राथमिकता के साथ सुना और उनका समाधान किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन कदमों से छात्राओं के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण तैयार होगा और महिला सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

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