NEWS PR डेस्क: पटना, 04 जून। बिहार सरकार ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत अब पंचायतों को अपने क्षेत्र से स्थानीय कर और सेवा शुल्क वसूलने का अधिकार मिलेगा। इस प्रस्ताव को वित्त विभाग की मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे अंतिम स्वीकृति के लिए राज्य कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।
योजना के मुताबिक, प्रत्येक ग्राम पंचायत अपने क्षेत्र के घरों से सालाना औसतन करीब 1200 रुपये तक का होल्डिंग टैक्स वसूल सकेगी। इसके अलावा पेयजल, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी नागरिक सुविधाओं के लिए भी अलग से शुल्क लिया जा सकता है। ‘हर घर नल का जल’ योजना के तहत मिलने वाली जलापूर्ति के लिए भी अनिवार्य यूजर चार्ज लागू करने की तैयारी है।
सरकार का कहना है कि गांवों में बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पंचायतों का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना जरूरी है। 16वें केंद्रीय वित्त आयोग ने भी पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने पर जोर दिया है। इसी को ध्यान में रखते हुए पंचायतों के लिए राजस्व के नए स्रोत विकसित किए जा रहे हैं।

प्रस्ताव के अनुसार सभी भवनों पर एक जैसा टैक्स नहीं लगेगा। आवासीय मकानों के मुकाबले व्यावसायिक भवनों पर अधिक कर लगाया जाएगा। दुकान, गोदाम या अन्य व्यावसायिक उपयोग वाले भवनों के लिए टैक्स की दर ज्यादा होगी। वहीं, मुख्य सड़क या बाजार क्षेत्र में स्थित संपत्तियों पर भी सामान्य ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक शुल्क निर्धारित किया जा सकता है।
वर्तमान में अधिकांश ग्राम पंचायतें विकास कार्यों के लिए सरकारी अनुदान पर निर्भर हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पंचायतें अपने स्तर पर भी राजस्व एकत्र कर सकेंगी। सरकार का मानना है कि इससे सड़क, पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में तेजी आएगी तथा भविष्य में सरकारी अनुदान पर निर्भरता भी घटेगी।
