कैबिनेट फैसलों के खिलाफ बिहार राजस्व सेवा संघ का आंदोलन, 2 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

Amit Singh
- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

NEWS PR डेस्क: बिहार में राजस्व प्रशासन से जुड़ी सेवाएं ठप होने की आशंका गहराती जा रही है। बिहार राजस्व सेवा संघ ने संवर्ग के पदोन्नति मार्ग में बदलाव और हालिया कैबिनेट निर्णयों के विरोध में 2 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। संघ की दरभंगा जिला इकाई ने स्पष्ट किया है कि यदि मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए निर्णय संख्या 23 और 30 को वापस नहीं लिया गया, तो राज्यभर में कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा।

राजस्व कार्यों के ठप होने की आशंका

यदि हड़ताल शुरू होती है तो राज्यभर में दाखिल-खारिज, भूमि विवाद निपटान, भू-अर्जन, म्यूटेशन, जमाबंदी सहित अन्य राजस्व संबंधी कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

संघ का कहना है कि 29 जनवरी को हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों के माध्यम से बिहार राजस्व सेवा के पदोन्नति ढांचे में मूलभूत और एकतरफा परिवर्तन कर दिया गया है। कैबिनेट निर्णय संख्या 23 के तहत बिहार राजस्व सेवा नियमावली, 2010 में उल्लिखित पदनाम भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) को बदलकर अनुमंडल राजस्व पदाधिकारी कर दिया गया है। संघ का आरोप है कि यह बदलाव नियमावली की मूल भावना के विपरीत है और इससे संवर्गीय ढांचे को कमजोर किया जा रहा है।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

वहीं, निर्णय संख्या 30 के अंतर्गत सामान्य प्रशासन विभाग के अधीन बिहार प्रशासनिक सेवा संवर्ग के लिए 101 पदों का स्थायी सृजन किया गया है। संघ का दावा है कि यह फैसला राजस्व सेवा अधिकारियों के पदोन्नति अवसरों को सीमित करने वाला है और इससे संवर्गीय संतुलन बिगड़ जाएगा।

संघ ने आरोप लगाया है कि DCLR और जिला भू-अर्जन पदाधिकारी (DLAO) जैसे तकनीकी पदों पर अन्य सेवाओं के अधिकारियों की तैनाती पटना उच्च न्यायालय के आदेशों की भावना के खिलाफ है। उनका कहना है कि सरकार ने अदालत के निर्देशों से बचने के लिए पदनाम परिवर्तन और नए पदों के सृजन का रास्ता अपनाया है।

राजस्व सेवा संघ का कहना है कि जिन पदोन्नति नियमों और सेवा शर्तों के आधार पर अधिकारियों ने सेवा में प्रवेश किया था, उन्हें बिना परामर्श एकतरफा बदल दिया गया है। इससे न केवल संवर्ग के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है, बल्कि अधिकारियों के भविष्य और करियर सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।

संघ ने यह भी दावा किया कि वर्षों की सेवा और तकनीकी दक्षता के बावजूद राजस्व सेवा अधिकारियों के प्रमोशन अवसर सीमित कर दिए गए हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में निहित समानता और समान अवसर के अधिकार के खिलाफ है। संघ ने दो टूक कहा है कि जब तक कैबिनेट के उक्त निर्णय वापस नहीं लिए जाते, तब तक किसी भी स्थिति में आंदोलन वापस नहीं होगा।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →
Share This Article