NEWS PR डेस्क: सुपौल: जहां लोग बेहतर इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, वहीं सुपौल सदर अस्पताल में जलजमाव और गंदगी की समस्या मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ा रही है। जिले के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में नालियों का गंदा पानी परिसर में जमा होने से मरीजों को इलाज के साथ-साथ स्वच्छता की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है।

अस्पताल परिसर में कई जगह जलजमाव की स्थिति बनी हुई है, लेकिन सबसे गंभीर हालात सिविल सर्जन कार्यालय के सामने देखने को मिल रहे हैं। यहां लंबे समय से पानी जमा रहने के बावजूद समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है।
गंदे पानी से होकर गुजरने को मजबूर मरीज
अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि वे पहले ही बीमारी से परेशान रहते हैं, लेकिन अस्पताल परिसर में फैली गंदगी, बदबू और जलजमाव उनकी मुश्किलों को और बढ़ा देता है। जलजमाव के कारण बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और गंभीर मरीजों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा भी बना रहता है।
सफाई व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का आरोप है कि स्वच्छता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों के बावजूद सदर अस्पताल की स्थिति अलग तस्वीर दिखा रही है। नियमित सफाई और जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण नालियों का पानी रास्तों और परिसर में फैल जाता है। बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जिससे मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
संक्रमण के खतरे को लेकर चिंता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर जलजमाव और गंदगी गंभीर समस्या है। इससे असुविधा के साथ-साथ संक्रमण और संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से नियमित सफाई, नालियों की समय-समय पर सफाई और बेहतर जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत बताई है।
स्थायी समाधान की मांग
मरीजों, उनके परिजनों और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग से सदर अस्पताल परिसर में जलजमाव की समस्या का जल्द स्थायी समाधान कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अस्पताल वह जगह है जहां लोग स्वस्थ होने की उम्मीद लेकर आते हैं। ऐसे में यदि उन्हें इलाज के साथ गंदगी और जलजमाव का सामना करना पड़े, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।सुपौल से अल्ताफ राजा की रिपोर्ट
