NEWS PR डेस्क: पटना, 28 जुलाई। बिहार संग्रहालय, पटना और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (IGRMS), भोपाल के बीच सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, अनुसंधान और संग्रहालय गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता आगामी पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा और दोनों संस्थानों के बीच दीर्घकालिक सहयोग का आधार बनेगा।
समझौते पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल की ओर से निदेशक प्रो. अभिलाष पांडे तथा बिहार संग्रहालय की ओर से महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने हस्ताक्षर किए।
कई क्षेत्रों में मिलकर करेंगे काम
समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त एवं भ्रमणशील प्रदर्शनियों का आयोजन, संग्रहालय वस्तुओं और प्रदर्शनी संसाधनों का आदान-प्रदान, लोक एवं जनजातीय कला-संस्कृति के संरक्षण, अनुसंधान, प्रलेखन, संग्रहालय आधारित शिक्षा, प्रशिक्षण, कार्यशालाओं, संगोष्ठियों, प्रकाशनों तथा संग्रहालय विशेषज्ञों के आदान-प्रदान जैसे विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर कार्य करेंगे।
डिजिटल तकनीक और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
एमओयू के अंतर्गत डिजिटल अभिलेखीकरण, वर्चुअल प्रदर्शनी, डिजिटल कैटलॉग, एआर/वीआर आधारित संग्रहालय अनुभव, पारंपरिक शिल्प एवं सांस्कृतिक नवाचार, समुदाय आधारित कार्यक्रम तथा विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप एवं प्रशिक्षण जैसी पहलों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

इसके अलावा दोनों संस्थान सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए संयुक्त रूप से शोध, प्रकाशन, व्याख्यान, परिचर्चा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जनसंपर्क गतिविधियों का भी आयोजन करेंगे।
संग्रहालयों के बीच सहयोग को मिलेगी नई गति
बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि यह समझौता भारतीय संग्रहालयों के बीच ज्ञान, अनुभव और संसाधनों के आदान-प्रदान को नई गति देगा। इससे संग्रहालयों को अनुसंधान, नवाचार, तकनीकी उन्नयन और जनसहभागिता के क्षेत्र में अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।
वहीं, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल के निदेशक प्रो. अभिलाष पांडे ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और उसके व्यापक प्रसार के लिए भविष्य में भी दोनों संस्थानों के संयुक्त प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इस समझौते को भारतीय संग्रहालयों के बीच सहयोग को मजबूत करने और देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
