NEWS PR डेस्क : पश्चिम चंपारण जिले में मदरसा एवं संस्कृत शिक्षकों का सब्र अब टूटने लगा है। पिछले पांच महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं होने से आर्थिक संकट झेल रहे शिक्षकों ने गुरुवार को जिला प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। मदरसा एवं संस्कृत शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने जिला पदाधिकारी (DM) और जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को ज्ञापन सौंपकर लंबित मानदेय का जल्द भुगतान कराने की मांग की।

शिक्षकों का कहना है कि लगातार पांच महीने से मानदेय नहीं मिलने के कारण उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो गया है। आर्थिक तंगी का असर बच्चों की पढ़ाई और परिवार के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।
बच्चों की पढ़ाई और इलाज पर पड़ा असर
शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि वेतन नहीं मिलने के कारण कई शिक्षक अपने बच्चों की स्कूल फीस तक जमा नहीं कर पा रहे हैं। वहीं बीमार परिजनों का इलाज कराना भी मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि आर्थिक संकट दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है।
नियमित पढ़ा रहे हैं, फिर भी रोका गया मानदेय’
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि सभी मदरसा एवं संस्कृत शिक्षक नियमित रूप से विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं, लेकिन बिना किसी स्पष्ट कारण के उनका मानदेय रोक दिया गया है। संघ ने कहा कि यदि किसी प्रकार की जांच आवश्यक है तो उसे निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराया जाए, लेकिन जांच के नाम पर सभी शिक्षकों का मानदेय रोकना उचित नहीं है।
सरकार से जल्द भुगतान की मांग, आंदोलन की चेतावनी
शिक्षक संघ ने बिहार सरकार से लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान करने की मांग की। उनका कहना है कि समय पर मानदेय मिलने से शिक्षक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ शैक्षणिक कार्य कर सकेंगे।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो मदरसा एवं संस्कृत शिक्षक अनिश्चितकालीन अनशन और व्यापक आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे। शिक्षकों ने कहा कि उनकी लड़ाई केवल मानदेय की नहीं, बल्कि परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और सम्मानजनक जीवन के अधिकार की भी है।पश्चिम चंपारण से मोहम्मद इम्तियाज की रिपोर्ट
