पीएम मोदी का ‘शक्ति की सप्तधारा’ विजन: विकास के 7 मंत्रों से विकसित भारत की नई राह, जानिए लाल किले से क्या बोले प्रधानमंत्री

Shreya Raj
लाल किले से पीएम मोदी ने देश को दिया ‘शक्ति की सप्तधारा’ का विकास मंत्र।

NEWS PR डेस्क : नई दिल्ली : देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए भारत के विकास के लिए सात सूत्रीय एजेंडा पेश किया। उन्होंने इसे ‘शक्ति की सप्तधारा’ नाम दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सात धाराओं के जरिए भारत अगले पांच से सात वर्षों में वह हासिल कर सकता है, जो पिछले पांच से सात दशकों में नहीं हो पाया।

‘सप्त सिंधु’ से प्रेरित है ‘शक्ति की सप्तधारा’

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ऐतिहासिक अवधारणा ‘सप्त सिंधु’ का उल्लेख करते हुए विकास की एक नई धारा का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ‘शक्ति की सप्तधारा’ देश को विकास की नई दिशा, नई गति और नए लक्ष्य हासिल करने की क्षमता देगी। पीएम मोदी के मुताबिक, आने वाले पांच से सात वर्षों में इन सात शक्तियों के प्रभाव से भारत विकास के ऐसे नए आयाम हासिल कर सकता है, जो बीते पांच से सात दशकों में संभव नहीं हो सके।

क्या हैं ‘शक्ति की सप्तधारा’ के 7 स्तंभ?

प्रधानमंत्री ने अगले दौर के सुधारों और विकास के लिए सात प्रमुख क्षेत्रों को आधार बताया। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, तकनीक एवं इनोवेशन, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, ग्रीन एवं ब्लू इकोनॉमी और सॉफ्ट पावर शामिल हैं।

  1. मैन्युफैक्चरिंग पर जोर

पहला फोकस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में बनने वाले उत्पादों को लागत, गुणवत्ता और उत्पादन के स्तर पर वैश्विक बाजार के अनुरूप प्रतिस्पर्धी बनाना होगा।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरें और दुनिया के बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बनाएं।

  1. कृषि और फूड प्रोसेसिंग

सप्तधारा का दूसरा महत्वपूर्ण स्तंभ कृषि और फूड प्रोसेसिंग है। प्रधानमंत्री ने भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के ब्रांड में बदलने की जरूरत बताई।

इसका उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन करके उन्हें दुनिया के बाजारों में पहचान दिलाना है।

तकनीक और कनेक्टिविटी से विकास को मिलेगी रफ्तार

  1. टेक्नोलॉजी और इनोवेशन

तीसरे स्तंभ के तौर पर प्रधानमंत्री ने तकनीक और नवाचार को रखा। इसमें डिजिटल और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के साथ-साथ नई और उभरती तकनीकों पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत को विकास के अगले चरण के लिए इन क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को और मजबूत करना होगा।

  1. गति शक्ति

चौथा स्तंभ गति शक्ति है। इसका उद्देश्य देश में तेज और बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से लोगों और सामान की आवाजाही तेज और आसान होगी। इससे देश की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

रक्षा से लेकर ग्रीन इकोनॉमी तक पर फोकस

  1. रक्षा शक्ति

पांचवें स्तंभ के रूप में रक्षा शक्ति को शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए अत्याधुनिक रक्षा तकनीक और अगली पीढ़ी की क्षमताएं विकसित करने की बात कही।

उन्होंने ड्रोन और सुपरसोनिक तकनीक जैसी आधुनिक क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

  1. ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी

छठा स्तंभ ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के प्राकृतिक संसाधन देश के लिए सतत विकास के नए अवसर पैदा कर सकते हैं।

इसका लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना है।

  1. सॉफ्ट पावर

सप्तधारा का सातवां और अंतिम स्तंभ सॉफ्ट पावर है। इसके तहत प्रधानमंत्री ने योग, आयुर्वेद, समग्र स्वास्थ्य, क्रिएटिव इंडस्ट्री और पर्यटन जैसे क्षेत्रों की क्षमता को रेखांकित किया।

भारत की सांस्कृतिक और पारंपरिक ताकतों को दुनिया तक पहुंचाकर देश की वैश्विक पहचान को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।

विकसित भारत के लक्ष्य की ओर नई दिशा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘शक्ति की सप्तधारा’ के जरिए विकास के सात प्रमुख क्षेत्रों को एक साथ आगे बढ़ाने का रोडमैप सामने रखा। मैन्युफैक्चरिंग से लेकर कृषि, तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, पर्यावरण और सॉफ्ट पावर तक इन सभी क्षेत्रों को भारत की भविष्य की विकास यात्रा से जोड़ा गया है।

प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि इन सात शक्तियों के साथ भारत आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों को छू सकता है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।

Share This Article