शारदीय नवरात्र को लेकर राजधानी पटना के प्रसिद्ध महावीर मन्दिर में तैयारियां जोरों पर हैं। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मन्दिर परिसर में माता का भव्य दरबार सजाया जाएगा। 3 डी पंडाल निर्माण का काम शुरू हो गया है, जहाँ माता की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी महावीर मंदिर परिसर में दुर्गा पूजा का आयोजन प्रारंभ से ही हो रहा है। इसकी शुरूआत महावीर मंदिर के संस्थापक सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने कराई थी। तब से मंदिर प्रांगण में दुर्गा पूजा का आयोजन होते आ रहा है। महावीर मन्दिर में दुर्गापूजा देखने के लिए लोग दूर-दूर से परिवार और बच्चों के साथ आते हैं और मन्दिर में देर तक रहते हैं।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की संभावना,
नवरात्र के दौरान महावीर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते है। इसके मद्देनजर मंदिर प्रबंधन ने भीड़ नियंत्रण, सुचारू दर्शन व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए तैयारी कर ली है। इस दौरान मन्दिर परिसर में एक विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिलेगा, महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल का कहना है कि महावीर मन्दिर में दुर्गा पूजा का आयोजन शुरू से ही हो रहा है। पिताजी ने इसकी शुरूआत कराई थी। वैसे भी दुर्गा पूजा के दौरान महावीर मंदिर में पंडाल और प्रतिमा देखने के लिए काफी भीड़ होती है। भक्तों की भीड़ देर रात तक रहती है। इस बार भव्य पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है।
सनातन संस्कृति में नवरात्र का महत्व
सनातन धर्म में नवरात्र एक प्रमुख पर्व है। ‘नव’ यानी नौ और ‘रात्रि’ यानी रात। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ अलग अलग स्वरूपों की विधि-विधान से आराधना की जाती है। शारदीय नवरात्र आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तक चलता है ! और दसवें दिन विजयादशमी (दशहरा) मनाई जाती है। यह पर्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को अपने भीतर की नकारात्मकता, अहंकार, क्रोध, लोभ और बुरे विचारों पर विजय पाने की प्रेरणा देता है। नौ दिनों तक संयम, उपवास, सात्विक भोजन, प्रार्थना और साधना के माध्यम से व्यक्ति आत्मअनुशासन और मानसिक शांति की ओर अग्रसर होता है।
विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान का कार्यक्रम,
नवरात्र के दौरान प्रमुख कार्यक्रम इस प्रकार हैं… !
11 अक्टूबर (रविवार): प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के साथ नवरात्र की शुरुआत होगी।
17 अक्टूबर (शनिवार): सप्तमी के दिन माता का पट खोला जाएगा।
18 अक्टूबर (रविवार): महाअष्टमी
19 अक्टूबर (सोमवार): नवमी के पावन अवसर पर विशेष हवन का आयोजन किया जाएगा।
21 अक्टूबर (बुधवार): विजयादशमी