NEWS PR डेस्क : गंगा नदी ने एक बार फिर रौद्र रूप धारण कर लिया है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब साढ़े तीन से चार फीट ऊपर पहुंच गया है। दियारा क्षेत्र की सात पंचायतें बाढ़ के पानी से पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं। कई इलाकों में सड़क से लेकर खेतों तक तीन से चार फीट पानी बह रहा है, जबकि घरों में भी डेढ़ से तीन फीट तक पानी घुस गया है।

बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए दियारा क्षेत्र के लोग सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। राहत शिविरों में भी प्रभावित परिवारों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।
नालों के रास्ते सेना और शहरी क्षेत्र में पहुंचा पानी
गुरुवार सुबह से गंगा के पानी का रिसाव नालों के रास्ते सेना क्षेत्र और शहरी इलाके में भी शुरू हो गया। सेना क्षेत्र के पोस्ट ऑफिस मैदान, बीआरसी क्षेत्र, सिंगलन कोर, वैशाली इंक्लेव और कोणार्क इंक्लेव में पानी प्रवेश करने लगा।
स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने मोर्चा संभाल लिया है। विभाग की टीम बालू से भरे बोरों की मदद से नालों को बंद करने में जुटी है। शहरी क्षेत्र के पेठिया बाजार स्थित शिव मंदिर और कागजी मोहल्ले के पास भी नालों से पानी का रिसाव शुरू हो गया है।
कार्यपालक अभियंता के अनुसार, शहरी और सेना क्षेत्र के सभी स्लुईस गेट और फाटकों को बालू भरे बोरों से बंद कर दिया गया है। देवानाला को भी बंद कर दिया गया है। सेना क्षेत्र में नालों को बंद करने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।
सात पंचायतों की करीब तीन लाख आबादी प्रभावित
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर दियारा क्षेत्र की गंगहरा, हेतनपुर, कासीमचक, पुरानी पानापुर, पतलापुर, मानस और अकिलपुर पंचायतों में देखने को मिल रहा है। इन पंचायतों की करीब तीन लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित बताई जा रही है।
कई इलाकों में घरों के अंदर पानी घुस चुका है। विशुनपुर अस्पताल सहित कई स्कूलों में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। किसानों की सैकड़ों एकड़ में लगी मकई और हरी सब्जियों की फसल पानी में डूब गई है।
बिजली और पेयजल व्यवस्था प्रभावित
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बिजली विभाग ने बुधवार सुबह से छह पंचायतों की बिजली आपूर्ति बंद कर दी है। बिजली बंद होने से पेयजलापूर्ति भी प्रभावित हुई है। दियारा क्षेत्र के कई गांवों में अंधेरा छा गया है।बाढ़ प्रभावित लोगों के सामने पीने के पानी, भोजन और सुरक्षित आवास की समस्या भी बढ़ती जा रही है।
नाव के सहारे राहत शिविर पहुंच रहे लोग
कासीमचक सहित अन्य बाढ़ प्रभावित इलाकों से लोग नाव के सहारे बलदेव स्कूल स्थित बाढ़ राहत शिविर सह सामुदायिक किचन में पहुंच रहे हैं।
बड़ा कासीमचक निवासी बाढ़ पीड़ित सेठ राय ने बताया कि उनके घर में करीब तीन फीट तक पानी घुस गया है। गुरुवार को उन्होंने घर का जरूरी सामान नाव के जरिए पीपा पुल घाट से राहत शिविर तक पहुंचाया।
राहत शिविर में पशुपालक अपने मवेशियों के साथ भी पहुंच रहे हैं। गुरुवार सुबह से कासीमचक के लोगों का शिविर में आने का सिलसिला शुरू हुआ। हालांकि, अभी तक सामुदायिक किचन में बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन बनना शुरू नहीं हुआ था।
छह पंचायतों में 12 नावों का परिचालन
एसडीओ वीरूपाक्ष विक्रम सिंह ने बताया कि प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। सरकारी स्तर पर छह पंचायतों में 12 नावों का परिचालन कराया जा रहा है। मेडिकल टीम के लिए भी एक अलग नाव चलाने का निर्देश दिया गया है।उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर एसडीआरएफ की टीम को भी बुलाया जाएगा। दियारा के निचले और तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को अलर्ट कर दिया गया है और उन्हें जल्द से जल्द ऊंचे व सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया गया है।
गंगा का जलस्तर 170.50 फीट रिकॉर्ड
गुरुवार सुबह देवानाला के पास गंगा का जलस्तर 170.50 फीट रिकॉर्ड किया गया। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल जलस्तर स्थिर है, लेकिन यह खतरे के निशान से करीब चार फीट ऊपर बह रहा है। ऐसे में निचले इलाकों में खतरा अभी भी बना हुआ है। सीओ प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि बाढ़ में डूबे घरों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया है। दियारा क्षेत्र के निचले इलाकों में घरों और झोपड़ियों में घुसे पानी का आकलन भी कराया जा रहा है।
राहत-बचाव कार्य तेज करने की मांग
बाढ़ की भयावह स्थिति को देखते हुए पूर्व जिला पार्षद ओमप्रकाश यादव, जिला पार्षद प्रतिनिधि सह भाजपा नेता रंजीत कुमार यादव, राजद महासचिव केडी यादव, मुखिया प्रतिनिधि वकील राय एवं सतीश कुमार और जदयू नेता संजय सिंह ने मुख्यमंत्री, आपदा प्रबंधन मंत्री, जिलाधिकारी और एसडीओ से दियारा क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चलाने की मांग की है। फिलहाल प्रशासन की नजर गंगा के जलस्तर पर बनी हुई है। सात पंचायतों में बाढ़ का पानी फैलने और शहरी एवं सेना क्षेत्र में भी पानी के प्रवेश के बाद प्रशासन के सामने स्थिति को नियंत्रित करने की बड़ी चुनौती है।
दानापुर से पशुपतिनाथ शर्मा की रिपोर्ट