गया में पहली बार लहलहा रहा काला नमक राइस, 18 से 20 बीघा में जैविक खेती की अनोखी पहल

Shreya Raj
गया में काला नमक राइस की खेती, खेत में फसल का जायजा लेते किसान बृजेंद्र चौबे।

NEWS PR डेस्क: हिमालय की तराई में पैदा होने वाला दुर्लभ काला नमक राइस अब गया की धरती पर भी लहलहा रहा है। गया के मटिहानी इलाके में किसान बृजेंद्र चौबे ने करीब 18 से 20 बीघा जमीन में काला नमक राइस की खेती शुरू की है। खास बात यह है कि इसकी खेती पूरी तरह गौ आधारित जैविक पद्धति से की जा रही है। बाजार में इस चावल की कीमत करीब 200 रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है।

मटिहानी के खेतों में तैयार हो रही खास किस्म

गया के मटिहानी इलाके के खेतों में इन दिनों सामान्य धान की फसल से अलग एक खास किस्म का चावल तैयार हो रहा है। इसे काला नमक राइस के नाम से जाना जाता है। इसे बुद्धा राइस भी कहा जाता है। किसान बृजेंद्र चौबे पिछले दो वर्षों से इसकी खेती का ट्रायल कर रहे थे। सफल प्रयोग के बाद अब उन्होंने बड़े पैमाने पर इसकी खेती शुरू की है।

काला नमक राइस को अपनी विशेष पहचान के लिए जाना जाता है। इसकी पैदावार सामान्य चावल की तुलना में कम होती है, लेकिन इसकी मांग देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों में भी बताई जाती है। इस चावल को जीआई टैग भी प्राप्त है, जिससे इसकी खास पहचान और बढ़ जाती है।

रासायनिक खाद और कीटनाशकों से दूरी

बृजेंद्र चौबे काला नमक राइस की खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। फसल को तैयार करने के लिए गौ आधारित जैविक पद्धति अपनाई जा रही है।

खेती में गोबर, गोमूत्र, छाछ, सहजन और नीम से तैयार जैविक घोल का इस्तेमाल किया जाता है। किसान का प्रयास है कि पारंपरिक किस्म के इस चावल को प्राकृतिक और जैविक तरीके से तैयार किया जाए। इससे खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है।

बाजार में करीब 200 रुपये किलो तक कीमत

काला नमक राइस की खासियत और सीमित उत्पादन के कारण बाजार में इसकी कीमत सामान्य चावल की तुलना में काफी अधिक बताई जाती है। इसकी कीमत करीब 200 रुपये प्रति किलो तक होने की जानकारी दी गई है।

कम उत्पादन के बावजूद देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेशों में भी इसकी मांग बताई जाती है। ऐसे में गया में इसकी बड़े पैमाने पर खेती शुरू होना किसानों के लिए एक नए विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

प्रोटीन, आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्व

विशेषज्ञों के मुताबिक काला नमक चावल में प्रोटीन, आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसकी पोषण संबंधी खूबियों के कारण भी इसे खास चावल की श्रेणी में रखा जाता है।

डायबिटीज के मरीजों के लिए इसके सेवन से जुड़े किसी भी दावे को व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही देखा जाना चाहिए। किसी भी मरीज को अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।

विशेषज्ञ ने भी बताई इसकी खासियत

मगध विश्वविद्यालय के बॉटनी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अमित कुमार सिंह के अनुसार, काला नमक राइस में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके गुणों और खेती से जुड़े पहलुओं को लेकर विशेषज्ञ स्तर पर भी इसकी उपयोगिता पर ध्यान दिया जा रहा है।

पारंपरिक किस्म के संरक्षण के साथ जैविक खेती को बढ़ावा

गया में काला नमक राइस की खेती एक ओर जहां प्राचीन और विशेष किस्म के चावल के संरक्षण की दिशा में पहल है, वहीं दूसरी ओर जैविक खेती को बढ़ावा देने का भी प्रयास है। किसान बृजेंद्र चौबे ने करीब 18 से 20 बीघा में इसकी खेती कर यह दिखाने की कोशिश की है कि गया की मिट्टी में भी इस विशेष किस्म की खेती को बड़े स्तर पर किया जा सकता है।

अगर उत्पादन और बाजार में मांग का बेहतर तालमेल बना रहा तो आने वाले समय में काला नमक राइस गया के किसानों के लिए खेती का एक नया और लाभकारी विकल्प बन सकता है।

गया से रिपोर्टर: आशीष कुमार

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