मुजफ्फरपुर-सोनबरसा फोरलेन को मिलेगी रफ्तार: भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज, जल्द जारी होगी अधिसूचना

यह परियोजना मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और सोनबरसा सहित पूरे उत्तर बिहार के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। खासतौर पर नेपाल सीमा तक बेहतर सड़क संपर्क बनने से व्यापार, परिवहन और क्षेत्रीय विकास को नया बल मिलने की उम्मीद है।

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: मुजफ्फरपुर, 26 अप्रैल। उत्तर बिहार की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल मुजफ्फरपुर–सोनबरसा फोरलेन परियोजना अब जमीन पर उतरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है और इसके लिए अधिसूचना शीघ्र जारी होने की उम्मीद है।

यह परियोजना मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और सोनबरसा सहित पूरे उत्तर बिहार के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। खासतौर पर नेपाल सीमा तक बेहतर सड़क संपर्क बनने से व्यापार, परिवहन और क्षेत्रीय विकास को नया बल मिलने की उम्मीद है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस दिशा में आवश्यक प्रक्रियाओं को तेज कर दिया है। एजेंसी द्वारा तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) संबंधित अधिकारियों को सौंप दी गई है। परियोजना निदेशक आशुतोष सिन्हा ने जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को रिपोर्ट भेजकर उसके सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कराने का अनुरोध किया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘थ्री-ए’ प्रस्ताव के सत्यापन के बाद इसे भूमि राशि पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसके बाद आधिकारिक अधिसूचना जारी कर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, जिससे परियोजना को औपचारिक गति मिल जाएगी।

करीब 82.55 किलोमीटर लंबी इस फोरलेन सड़क का निर्माण 2800 से 3500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जाना है। सड़क की चौड़ाई लगभग 22 मीटर होगी, जिसमें डिवाइडर भी शामिल रहेगा। पहले चरण में लगभग 2500 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है और टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है।

हालांकि, परियोजना के मार्ग में कई स्थानों पर अतिक्रमण की समस्या भी सामने आई है। एनएचएआई ने इस संबंध में जिला प्रशासन को रिपोर्ट भेजते हुए अतिक्रमण हटाने का अनुरोध किया है। अतिक्रमण हटने के बाद ही सीमांकन कर ‘राइट ऑफ वे’ निर्धारित किया जाएगा, जिससे निर्माण कार्य में बाधाएं कम होंगी।

टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और सभी आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, काम शुरू होने के बाद इसे करीब ढाई वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। कुल मिलाकर, यह फोरलेन परियोजना उत्तर बिहार के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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