NEWS PR डेस्क: पटना: बिहार में संगठित अपराध और अवैध गतिविधियों के खिलाफ पुलिस मुख्यालय ने बड़ा अभियान शुरू किया है। राज्यभर में 4 हजार से अधिक ऐसे माफिया और अपराधी चिह्नित किए गए हैं, जिनकी अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इस कार्रवाई में बालू, शराब और जमीन माफिया के साथ नारकोटिक्स कारोबार और मानव तस्करी से जुड़े प्रमुख अपराधी भी शामिल हैं।
BNSS की धारा 107 के तहत होगी कार्रवाई
एडीजी विधि-व्यवस्था के. एस. अनुपम के अनुसार, चिह्नित माफियाओं की संपत्ति जब्ती के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 107 के तहत प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। पुलिस अपराध से अर्जित संपत्ति का पता लगाने के लिए ट्रेल मॉनिटरिंग सिस्टम का भी इस्तेमाल कर रही है।
करीब 800 मामलों के प्रस्ताव अदालत में
पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, माफियाओं की संपत्ति जब्ती से जुड़े करीब 800 प्रस्ताव अदालतों तक पहुंच चुके हैं। इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया चल रही है। पुलिस का कहना है कि संपत्ति जब्ती सीधे तौर पर नहीं की जाएगी, बल्कि अदालत में संबंधित पक्षों के दावे और आपत्तियों की सुनवाई के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।

LJP (रामविलास) के विधायक अमित रानू भी जांच के दायरे में
इस अभियान के बीच लोजपा (रामविलास) के सीतामढ़ी जिले के बेलसंड से विधायक अमित कुमार रानू का नाम भी सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जमीन विवाद और तोड़फोड़ से जुड़े मामलों को लेकर विधायक और उनके करीबियों की चल-अचल संपत्ति तथा बैंक खातों की जांच की जा रही है। उनके खिलाफ 10 प्राथमिकी दर्ज होने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
पुलिस इन मामलों में कानूनी जांच आगे बढ़ा रही है। यदि जांच में अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति के संबंध में पर्याप्त आधार सामने आता है, तो नियमानुसार जब्ती की कार्रवाई की जा सकती है हालांकि, किसी संपत्ति की जब्ती अदालत की निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।
बालू से लेकर मानव तस्करी तक, कई तरह के माफिया निशाने पर
पुलिस की सूची में अलग-अलग तरह की अवैध गतिविधियों से जुड़े लोग शामिल हैं। इनमें बालू माफिया, शराब माफिया, भू-माफिया, नारकोटिक्स कारोबार से जुड़े अपराधी और मानव तस्करी के प्रमुख आरोपी शामिल हैं। पुलिस का उद्देश्य अपराध से अर्जित आर्थिक संसाधनों पर कार्रवाई कर संगठित अपराध के नेटवर्क को कमजोर करना है।
पुलिस मुख्यालय की इस कार्रवाई से साफ है कि बिहार में माफिया और संगठित अपराध के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में अदालतों से मिलने वाले आदेशों के आधार पर चिन्हित मामलों में संपत्ति कुर्क या जब्त करने की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।