‘द वन’ में बिहार की संस्कृति का रंग, छठ पूजा से लेकर वन देवी की लोककथा तक आएगी नजर

Rashmi Tiwari

NEWS PR डेस्क: बॉलीवुड की अपकमिंग फैंटेसी फिल्म ‘द वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ अपनी कहानी के साथ-साथ बिहार की संस्कृति को पर्दे पर उतारने को लेकर भी चर्चा में है। फिल्म में बिहार के सबसे प्रमुख लोकपर्व छठ की भव्य झलक देखने को मिलेगी। इसी कड़ी में फिल्म का नया गीत ‘छठी मइया सुनीं लीं विनती हमार…’ रिलीज किया जा रहा है।

फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। छठ पर आधारित गीत में बिहार की धार्मिक परंपरा, घाटों का माहौल और श्रद्धालुओं की आस्था को फैंटेसी कहानी के साथ जोड़ा गया है।
छठ की परंपरा को समझकर तमन्ना ने की शूटिंग
छठ गीत का हिस्सा बनने को लेकर तमन्ना भाटिया पहले ही अपना अनुभव साझा कर चुकी हैं। उन्होंने बताया था कि वह इस पर्व को हमेशा श्रद्धा और सम्मान की नजर से देखती रही हैं। शूटिंग से पहले उन्होंने छठ की परंपराओं और खासतौर पर बिहार-पटना में इसके आयोजन के तरीके को समझने की कोशिश की।
अभिनेत्री के मुताबिक छठ के दौरान लोगों की आस्था और भावनात्मक जुड़ाव ने उन्हें काफी प्रभावित किया। उन्होंने महसूस किया कि इस पर्व में सिर्फ पूजा की रस्में नहीं, बल्कि लोगों की गहरी भावनाएं और विश्वास भी जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि उन्होंने फिल्म में छठ के चित्रण को बेहद खास अनुभव माना।
लाल साड़ी और लंबा सिंदूर बना खास आकर्षण
गीत में तमन्ना का लुक पूरी तरह बिहारी परंपरा से प्रेरित नजर आ रहा है। वह लाल साड़ी में दिखाई देंगी और नाक की सीध तक लंबा सिंदूर लगाए हुए हैं। हाथों में पूजा की टोकरी और खुले बालों के साथ उनका किरदार छठ व्रत की श्रद्धा में डूबा नजर आता है। गीत के दृश्यों में उन्हें पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते हुए दिखाया गया है। घाट पर मौजूद श्रद्धालु, पूजा की तैयारियां और वातावरण फिल्म के धार्मिक एवं सांस्कृतिक पक्ष को उभारते हैं।
बिहटा के वन देवी मंदिर से जुड़ी है कहानी
फिल्म की कहानी बिहार के बिहटा स्थित करीब चार शताब्दी पुराने वन देवी मंदिर से जुड़ी लोककथा से प्रेरित बताई गई है। यह मंदिर पटना से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। फिल्म के निर्माताओं ने स्थानीय मान्यता और फैंटेसी तत्वों को मिलाकर कहानी को सिनेमाई रूप देने की कोशिश की है।
निर्माता अरुणाभ कुमार के अनुसार, बचपन में उनकी मां उन्हें दुर्गापूजा के दौरान अलग-अलग देवी मंदिरों में लेकर जाती थीं। इसी क्रम में वह बिहटा के वन देवी मंदिर भी पहुंचे थे। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं और वहां के वातावरण ने उनके मन में फिल्म की कहानी का विचार पैदा किया।
वन देवी से जुड़ी है सदियों पुरानी मान्यता
स्थानीय मान्यता के मुताबिक मंदिर की स्थापना 16वीं सदी में वैद्यनाथ मिश्रा ने की थी। कहा जाता है कि उस दौर में इलाके के लोग जंगल से जुड़े रहस्यमय घटनाक्रमों से परेशान थे। इससे मुक्ति के लिए देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की गई और वन देवी के रूप में एक शक्ति की स्थापना की गई। इसी लोककथा को आधार बनाकर फिल्म की दुनिया तैयार की गई है। अरुणाभ कुमार ने फिल्म की कहानी निर्देशक दीपक मिश्रा और एकता कपूर के साथ साझा की थी। इसके बाद इसे बड़े पर्दे के लिए विकसित करने का सुझाव मिला।
भोजपुरी में छठ गीत को मिला बॉलीवुड मंच
फिल्म के छठ गीत को विशाल मिश्रा ने अपनी आवाज देने के साथ इसका संगीत भी तैयार किया है, जबकि गीत के बोल कौशल किशोर ने लिखे हैं। विशाल मिश्रा ने सोशल मीडिया पर भोजपुरी भाषा और बिहार-पूर्वांचल की सांस्कृतिक पहचान को लेकर अपनी भावनाएं साझा कीं। उनका कहना है कि भोजपुरी केवल संवाद की भाषा नहीं बल्कि क्षेत्र की मिट्टी, लोकपरंपरा और पहचान का हिस्सा है। फिल्म के जरिए छठी मइया को समर्पित गीत को हिंदी सिनेमा के बड़े मंच पर लाने की कोशिश की गई है।
25 सितंबर को सिनेमाघरों में आएगी फिल्म
‘द वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ में पौराणिक लोकविश्वास, बिहार की संस्कृति और फैंटेसी का मेल देखने को मिलेगा। फिल्म में छठ पूजा के अलावा वन देवी से जुड़ी कहानी भी अहम भूमिका में होगी। फिल्म 25 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

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