पटना यूनिवर्सिटी में AISF का हल्लाबोल, 10 सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू; VC के इस्तीफे की मांग

Shreya Raj
पटना यूनिवर्सिटी में AISF कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, 10 सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल।

NEWS PR डेस्क: पटना विश्वविद्यालय में छात्रों की विभिन्न समस्याओं और 10 सूत्री मांगों को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। सोमवार से विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल के बाहर शुरू हुए इस आंदोलन में छात्र नेताओं ने कुलपति के इस्तीफे की भी मांग उठाई। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

एलएलबी प्रवेश परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग

AISF की प्रमुख मांगों में पटना विश्वविद्यालय की एलएलबी प्रवेश परीक्षा को रद्द कर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दोबारा आयोजित कराना शामिल है। छात्र नेताओं का आरोप है कि परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद प्रश्नपत्र अलग-अलग व्हाट्सऐप ग्रुप में प्रसारित हो गया था। संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रश्नपत्र बाहर आने की बात स्वीकार की, लेकिन परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने से इनकार कर दिया।

PG फीस वृद्धि वापस लेने समेत कई मांगें

AISF ने विश्वविद्यालय के पीजी पाठ्यक्रमों में बढ़ाई गई फीस को तत्काल वापस लेने की मांग की है। इसके अलावा पटना विश्वविद्यालय में MFA की पढ़ाई जल्द शुरू करने और केंद्रीय पुस्तकालय को छात्रों के लिए 24 घंटे यानी 24×7 खोलने की मांग भी की गई है। संगठन ने विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात भी उठाई है।

तीन छात्र नेताओं ने शुरू किया अनशन

भूख हड़ताल की शुरुआत छात्र नेताओं बिट्टू भारद्वाज, प्रिंस राज और किशलय के अनशन से हुई। इस दौरान उन्हें माला पहनाकर आंदोलन की शुरुआत की गई। AISF के पटना जिला सचिव मीर सैफ अली ने कहा कि पटना विश्वविद्यालय देश के पुराने और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शामिल है। संगठन का कहना है कि छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

कुलपति पर संवाद नहीं करने का आरोप

भाकपा नेता शंभू ने भी आंदोलन का समर्थन किया और विश्वविद्यालय के कुलपति पर छात्रों के साथ कथित तौर पर तानाशाहीपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। AISF के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव विश्वजीत कुमार ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए कुलपति पर छात्रों और कर्मचारियों से संवाद नहीं करने का आरोप लगाया।

मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

AISF नेताओं ने कहा कि फीस वृद्धि, एलएलबी प्रवेश परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक, MFA की पढ़ाई शुरू करने, केंद्रीय पुस्तकालय को 24 घंटे खोलने और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा जैसे मुद्दों पर विश्वविद्यालय प्रशासन को जवाब देना होगा। संगठन ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रहेगी।

पटना विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार विश्वविद्यालय की स्थापना 1917 में हुई थी और यह बिहार का पहला तथा भारतीय उपमहाद्वीप के सातवें सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक है। ऐसे में छात्रों का आंदोलन विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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