NEWS PR डेस्क: भागलपुर के कहलगांव अंचल में बाढ़ प्रभावित परिवारों को मिलने वाली अनुग्रह राहत राशि यानी जीआर को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। महेशमुंडा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि तबरेज आलम समेत कई वार्ड सदस्यों ने कहलगांव अंचलाधिकारी श्रीनिवास कुमार और एक हल्का कर्मचारी पर राहत सूची में नाम जोड़ने के बदले कथित तौर पर ₹1300 मांगने का आरोप लगाया है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि बाढ़ से प्रभावित परिवारों के नाम राहत राशि की सूची में शामिल करने के दौरान कथित रूप से पैसों की मांग की जा रही है। आरोप है कि जो लोग पैसे देने में सक्षम नहीं हैं या देने से इनकार करते हैं, उनके नाम सूची में दर्ज नहीं किए जा रहे हैं। कहलगांव में हाल के दिनों में बड़ी संख्या में परिवार बाढ़ से प्रभावित हुए हैं और राहत व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी काम किया गया है।
राहत सूची में नाम जोड़ने के बदले पैसे मांगने का आरोप
पंचायत प्रतिनिधियों के मुताबिक, बाढ़ के कारण कई परिवारों का घर, सामान और रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हुआ है। ऐसे में सरकार की ओर से मिलने वाली अनुग्रह राहत राशि इन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण मदद है।
आरोप लगाने वाले जनप्रतिनिधियों का कहना है कि राहत राशि की सूची तैयार करने के दौरान कुछ लाभुकों से ₹1300 की कथित मांग की जा रही है। उनका आरोप है कि पैसे नहीं देने वाले परिवारों को सूची में शामिल नहीं किया जा रहा है हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
तबरेज आलम समेत वार्ड सदस्यों में नाराजगी
मामले को लेकर महेशमुंडा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि तबरेज आलम सहित कई वार्ड सदस्यों में नाराजगी बताई जा रही है। उनका कहना है कि बाढ़ जैसी आपदा के समय प्रभावित परिवार पहले से आर्थिक और सामाजिक परेशानियों से जूझ रहे हैं।
ऐसे में सरकारी राहत पाने के लिए किसी तरह की कथित अतिरिक्त मांग नहीं होनी चाहिए। जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
CO और हल्का कर्मचारी का पक्ष सामने आना बाकी
मामले में कहलगांव अंचलाधिकारी श्रीनिवास कुमार और संबंधित हल्का कर्मचारी का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल ₹1300 मांगने के आरोपों को आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है।
जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि राहत सूची में नाम जोड़ने के लिए पैसे मांगने की बात में कितनी सच्चाई है। जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कर प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत दिलाने की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि कहलगांव प्रखंड के कई इलाकों में इस बाढ़ के दौरान बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे और राहत व्यवस्था के तहत सामुदायिक रसोई समेत अन्य व्यवस्थाएं भी संचालित की गई थीं।
भागलपुर से रिपोर्टर: शयामानंद सिह