SIR को लेकर आरके सिंह का बड़ा बयान,CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर सवाल

Rashmi Tiwari

NEWS PR डेस्क : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रही बहस अब और तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरा के पूर्व सांसद आरके सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक खुले पत्र के जरिए सिंह ने देशभर में SIR लागू करने के फैसले के कानूनी आधार पर आपत्ति जताई है। साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर कड़े कदम उठाने और चुनाव बहिष्कार जैसे विकल्प पर विचार करने की अपील की है।
SIR लागू करने के आधार पर सवाल
आरके सिंह ने अपने पत्र में Representation of the People Act, 1950 की धारा 21 का हवाला दिया। उनका कहना है कि मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण विशेष परिस्थितियों में किया जा सकता है और इसके पीछे कारणों को दर्ज किया जाना जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब SIR को देशव्यापी स्तर पर लागू किया गया, तो इसके लिए वह आधार क्या था।
Form 6 को लेकर भी उठाए सवाल
पूर्व नौकरशाह ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में कथित बदलाव पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म में अतिरिक्त घोषणा से जुड़ा प्रावधान जोड़ा गया, जिसकी वैधता पर सवाल उठते हैं। इस बीच मीडिया की रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से SIR और Form 6 से जुड़े कुछ मुद्दों पर लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात कही गई थी। इसी आधार पर सिंह ने आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाया है।
चुनाव आयोग ने दिया अलग पक्ष
हालांकि, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय बताया है। आयोग का कहना है कि आंतरिक चर्चा और विचार-विमर्श को निर्णय पर असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आरके सिंह ने अपने पत्र में EVM के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने, CEC के खिलाफ कार्रवाई और मतदाता अपीलों से जुड़े मामलों पर भी अपनी राय रखी है। इस पूरे मामले में सिंह के आरोप उनके पत्र में किए गए दावे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने SIR की प्रक्रिया और अपने निर्णयों का बचाव किया है।

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