गया टिकारी मार्ग पर पंचानपुर के पास स्थित रामेश्वर बाग कभी अपनी भव्यता, विशाल महल और खूबसूरत बाग-बगीचों के लिए जाना जाता था। टिकारी राज के सात आने की मालकिन रामेश्वरी कुंवर उर्फ दुल्हन साहिबा ने करीब 1890 के आसपास इसका निर्माण कराया था।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रामेश्वर बाग का महल काफी विशाल और भूल-भुलैया जैसा था। कहा जाता है कि महल में करीब 500 कमरे और 500 दरवाजे थे। इसकी बनावट ऐसी थी कि अनजान व्यक्ति आसानी से रास्ता भटक सकता था। महल परिसर में कई मंदिर, तालाब और बाग-बगीचे भी हुआ करते थे।
रामेश्वरी कुंवर धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। उन्होंने यहां कई मंदिरों का निर्माण कराया था, जिनमें भगवान शिव और राधा-कृष्ण समेत कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित थीं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, महल में उनकी प्रतिमा भी लगी थी, जिसकी आंखों में हीरे जड़े थे, लेकिन बाद में असामाजिक तत्वों ने उसे क्षतिग्रस्त कर दिया।
बाग में थे कई तरह के फल और फूल,
रामेश्वर बाग का बगीचा भी कभी इसकी खास पहचान हुआ करता था। यहां आम, अमरूद, आंवला, अनार, केला, पपीता, इमली और नींबू समेत कई तरह के फलदार पेड़ लगे थे। अलग-अलग किस्मों के फूल भी लगाए गए थे। स्थानीय लोग बताते हैं कि त्योहारों के समय आसपास के लोग यहीं से फल और फूल लेकर जाते थे।
रामेश्वर बाग और टिकारी किले के बीच करीब सात किलोमीटर लंबी सुरंग होने की बात भी स्थानीय लोग बताते हैं। हालांकि अब इस सुरंग का अधिकांश हिस्सा अस्तित्व में नहीं है।
रामेश्वरी कुंवर को लेकर स्थानीय क्षेत्र में उनकी न्यायप्रियता और दयालुता के कई किस्से आज भी सुनने को मिलते हैं। बताया जाता है कि वह जरूरतमंदों के साथ-साथ पशु-पक्षियों के प्रति भी संवेदनशील थीं।
आज जर्जर हो रही ऐतिहासिक धरोहर,
समय के साथ रामेश्वर बाग की स्थिति बदलती चली गई। आज यह ऐतिहासिक परिसर जीर्ण-शीर्ण हालत में है। कई पुरानी संरचनाएं टूट रही हैं और देखरेख का अभाव साफ नजर आता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रामेश्वर बाग सिर्फ एक पुराना महल नहीं, बल्कि गया के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर है। सरकार को इसका संरक्षण कर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना चाहिए, ताकि 500 दरवाजों वाले इस ऐतिहासिक महल की पहचान आने वाली पीढ़ियों तक बनी रहे।
गया से आशीष कुमार की रिपोर्ट ;-