Karwa Chauth 2026: कब निकलेगा चांद? जानें पूजा विधि, मंत्र और व्रत कथा

Rashmi Tiwari

NEWS PR डेस्क :करवा चौथ 2026: पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ सुहागिन महिलाएं आज करवा चौथ का व्रत कर रही हैं। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर मनाए जाने वाले इस पर्व में महिलाएं दिनभर उपवास रखकर शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और चंद्रदेव की पूजा करेंगी। दी गई जानकारी के अनुसार, आज रात 8:56 बजे के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय बताया गया है।

शुभ योग में होगी करवा चौथ की पूजा
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस बार करवा चौथ पर रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र के साथ परिघ योग, बुधादित्य योग और लक्ष्मीनारायण योग का संयोग बताया गया है। मान्यता है कि इस अवसर पर विधि-विधान से पूजा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम, सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
चांद देखकर पूरा होगा व्रत
करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है। महिलाएं शाम को सोलह श्रृंगार कर पूजा करेंगी और चंद्रमा निकलने के बाद चलनी से चंद्र दर्शन करेंगी। इसके बाद पति को चलनी से देखकर चंद्रदेव को दूध, जल और अन्य पूजन सामग्री से अर्घ्य अर्पित किया जाएगा फिर पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत को पूर्ण करेंगी।
वीरावती की कथा से जुड़ी है परंपरा
करवा चौथ की प्रचलित कथा वीरावती से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार, सात भाइयों की इकलौती बहन वीरावती ने विवाह के बाद यह व्रत रखा था। भूख से व्याकुल बहन को देखकर भाइयों ने दीपक की रोशनी से चंद्रमा निकलने का भ्रम पैदा कर दिया। व्रत टूटने के बाद उसके पति पर संकट आया। बाद में वीरावती ने श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत किया और अपने पति के प्राण वापस प्राप्त किए।

विधि-विधान से करें पूजन
पूजा में माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करने के साथ भगवान शिव, गणेश, कार्तिकेय और चंद्रदेव की आराधना की जाती है। श्रद्धालु ‘ॐ नमः शिवाय’, ‘ॐ गणेशाय नमः’ और ‘ॐ सोमाय नमः’ मंत्रों का जाप कर सकते हैं। पूजा के बाद परंपरा के अनुसार सास को सुहाग सामग्री भेंट करने का भी विधान है।
करवा चौथ पूजा विधि
करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और जल-अक्षत लेकर व्रत का संकल्प करें। पूजा के लिए बालू या सफेद मिट्टी की वेदी बनाकर पीपल का चित्र बनाएं। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और कार्तिकेय की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
माता पार्वती का षोडशोपचार पूजन कर सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। भगवान शिव को ‘ॐ नमः शिवाय’, कार्तिकेय को ‘ॐ षण्मुखाय नमः’ और चंद्रदेव को ‘ॐ सोमाय नमः’ मंत्र से पूजें। परंपरा के अनुसार, आटे के लड्डू का भोग लगाएं और सास को सुहाग सामग्री भेंट करें। रात में चंद्रमा के दर्शन कर चांदी या तांबे के लोटे से अर्घ्य दें। इसके बाद पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत का पारण करें।

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